एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Hanuman Janmotsav Shimla : जाखू मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के करीब चार बजे से ही श्रद्धालु श्रीराम भक्त हनुमान के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे और दोपहर तक यहां हजारों की संख्या में भक्त एकत्र हो गए। अनुमान के अनुसार इस पावन अवसर पर 35 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने जाखू पहुंचकर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया।

मंदिर में सुबह सबसे पहले विधि-विधान के साथ हनुमान जी की पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद सुबह सात बजे बजरंगबली को करीब डेढ़ क्विंटल आटे से तैयार विशेष रोट का भोग अर्पित किया गया, जो इस पर्व की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। पूरे मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा। भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट की।
भंडारे के अलावा पिज्जा, आइसक्रीम के लगे थे स्टॉल
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। भंडारे का आयोजन किया गया, जहां हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही यहां पिज्जा, आइसक्रीम और अन्य खाद्य सामग्री के स्टॉल भी लगाए गए, जिससे मेले जैसा वातावरण देखने को मिला। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीम भी तैनात रही।
मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर भी पहुंचे जाखू

इस पावन अवसर पर प्रदेश के कई प्रमुख नेता भी जाखू मंदिर पहुंचे। सुखविंद्र सिंह सुक्खू और जयराम ठाकुर ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी अपनी धर्मपत्नी के साथ मंदिर पहुंचे और बजरंगबली का आशीर्वाद लिया।
जानिए जाखू मंदिर के बारे में
जाखू मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और आस्था, इतिहास तथा प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। जाखू मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता के अनुसार जब भगवान हनुमान लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लेने हिमालय की ओर जा रहे थे, तब वे इस पहाड़ी पर कुछ समय के लिए रुके थे। यहां उनकी मुलाकात ऋषि यक्ष से हुई थी। हनुमान ने वापस लौटकर मिलने का वादा किया लेकिन रास्ते में कालनेमि नामक राक्षस के कारण उन्हें देरी हो गई। बाद में लौटकर हनुमान ने ऋषि यक्ष को दर्शन दिए कहा जाता है कि इसी स्थान पर हनुमान के चरणों के निशान पड़े और बाद में यहां उनकी स्वयंभू (प्रकट) मूर्ति स्थापित हुई।
🏔️ भौगोलिक स्थिति और विशेषता
जाखू मंदिर शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ी जाखू हिल (लगभग 8,000 फीट) पर स्थित है। यहां से पूरे शहर का बेहद सुंदर नज़ारा दिखाई देता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल ट्रैक, सड़क और रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। आसपास घने देवदार के जंगल हैं। यहां बंदरों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए सावधानी रखना जरूरी है। मंदिर परिसर में भगवान हनुमान की लगभग 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो दूर-दूर से दिखाई देती है। यह प्रतिमा शिमला की पहचान बन चुकी है और देश की ऊंची हनुमान मूर्तियों में गिनी जाती है।
