एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि रियायती मानकों का लाभ लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता। यह फैसला सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से वर्ष 2022 में विज्ञापित सहायक अभियंता (विद्युत) के 76 पदों की भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ईडब्ल्यूएस श्रेणी से संबंधित थी, जिसने यह तर्क दिया कि एक अन्य चयनित उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी में गिना जाना चाहिए था। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि ऐसा होता तो ईडब्ल्यूएस श्रेणी में एक पद रिक्त हो जाता और उसका चयन संभव हो जाता। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में कट-ऑफ, आयु या अन्य श्रेणीगत छूट का लाभ लेता है, तो वह सामान्य श्रेणी में मेरिट के आधार पर चयन का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने रिकॉर्ड के अवलोकन में पाया कि संबंधित उम्मीदवार ने स्क्रीनिंग टेस्ट में ईडब्ल्यूएस श्रेणी की रियायत का लाभ लिया था, इसलिए उसे सामान्य श्रेणी में माइग्रेट करना नियमों के विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए यह दोहराया कि आरक्षण का लाभ और सामान्य श्रेणी में चयन, दोनों एक साथ तभी संभव हैं जब उम्मीदवार ने पूरी चयन प्रक्रिया में कोई छूट न ली हो।
