एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Himachal High Court ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए आउटसोर्स स्टाफ नर्सों की भर्ती मामले में 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह राशि आईजीएमसी शिमला के निर्धन रोगी उपचार कोष में जमा करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अदालती आदेशों की अवहेलना और समय पर हलफनामा दाखिल न करने पर सरकार के प्रति नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। अदालत के अनुसार यह कर्मचारियों का शोषण है, क्योंकि उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन मिलता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) से भी जुड़ा है, क्योंकि आउटसोर्स स्टाफ पर विभाग का सीधा नियंत्रण नहीं होता, जिससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
आदेशों की अवहेलना पर सख्ती
Himachal High Court की खंडपीठ ने पाया कि 31 दिसंबर 2025 को दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल नहीं किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी 17 मार्च 2025 को इस मामले को 8 सप्ताह में निपटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद देरी की गई। अदालत ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और स्टाफ नर्सों के खाली पदों को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार नियुक्तियां नियमित या अनुबंध आधार पर होनी चाहिए, लेकिन सरकार आउटसोर्सिंग का सहारा ले रही है।
25 मार्च तक मांगी पूरी रिपोर्ट
Himachal High Court ने राज्य सरकार को 25 मार्च तक विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं, जिसमें शामिल हैं:
अब तक भरे गए स्टाफ नर्स पदों की संख्या
आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की नीति
विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा डेटा
कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर जानकारी नहीं दी गई तो राज्य के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
