एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब राज्य सरकार मंदिरों में चढ़ावे और दान की राशि का उपयोग सरकारी विकास कार्यों जैसे सड़कों, पुलों और सार्वजनिक भवनों के निर्माण में नहीं कर सकेगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस राकेश कैंथला की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि मंदिरों का धन केवल धार्मिक कार्यों, मंदिरों के रखरखाव और भक्तों के कल्याण के लिए ही प्रयोग किया जा सकता है।
कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी ट्रस्टी या अधिकारी द्वारा मंदिर निधि का दुरुपयोग पाया जाता है, तो उससे पूरा धन वसूला जाएगा। ऐसे व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ आपराधिक विश्वासघात का मामला बन सकता है। पीठ ने कहा, “देवता एक न्यायिक व्यक्ति हैं, उनका धन सरकार का नहीं है। ट्रस्टी केवल संरक्षक हैं और किसी भी प्रकार का दुरुपयोग एक अपराध है।” अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिरों की दान राशि से मंदिर अधिकारियों या कमिश्नर के लिए वाहन नहीं खरीदे जा सकेंगे। इसके साथ ही, वीआईपी के स्वागत के लिए उपहार, स्मृति चिन्ह या मंदिर की तस्वीरें खरीदने पर भी रोक लगा दी गई है।
पीठ ने टिप्पणी की कि प्रदेश में वर्तमान और पूर्व सरकारों ने मंदिरों की राशि का उपयोग सरकारी कार्यों में किया है, जिससे धार्मिक निधियों के दुरुपयोग पर विवाद और राजनीति दोनों बढ़ी हैं। यह फैसला एक जनहित याचिका पर आया। याची ने मांग की थी कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी “हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ निधि अधिनियम, 1984” का सख्ती से पालन करें। उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि दान राशि का अलग बजट तैयार कर पारदर्शिता बनाए रखी जाए।
हर महीने सार्वजनिक होगा मंदिरों का आय-व्यय ब्योरा
हाईकोर्ट ने मंदिरों को आदेश दिया है कि वे अपनी मासिक आय-व्यय, दान से वित्त पोषित योजनाओं का विवरण और लेखापरीक्षा रिपोर्ट मंदिर परिसर के नोटिस बोर्ड या आधिकारिक वेबसाइटों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भक्तों का विश्वास बना रहे और उन्हें यह जानकारी रहे कि उनके दान का उपयोग धर्म और समाज के कल्याण के लिए किया जा रहा है।
सरकारी या निजी योजनाओं में निवेश पर भी रोक
कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिरों की निधियों का उपयोग सरकारी कल्याण योजनाओं, निजी व्यवसायों या उद्योगों में निवेश, या दुकानें, मॉल या होटल चलाने के लिए नहीं किया जा सकता। दान की गई धनराशि केवल धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों में ही खर्च की जाएगी।
