एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
500 वन रक्षक पद समाप्त कर ₹16,000 प्रतिमाह मानदेय पर सहायक वन रक्षक रखने के निर्णय से वन विभाग के कर्मचारियों में भारी रोष है। फॉरेस्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन, वन वृत्त रामपुर ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या FFE-A(B)2-2/2026 दिनांक 28 अप्रैल 2026 पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है और मुख्यमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर कर्मचारियों के भविष्य और वन विभाग की गरिमा की रक्षा करने की अपील की है।
एसोसिएशन के अनुसार इस अधिसूचना के तहत 500 नियमित वन रक्षक पदों को समाप्त कर उनके स्थान पर मात्र ₹16,000 के निश्चित मानदेय पर ‘सहायक वन रक्षक’ नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल उनके हितों के खिलाफ है, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित भारती ने कहा कि वन रक्षक और प्रस्तावित सहायक वन रक्षक के कार्य, जोखिम और जिम्मेदारियां समान हैं। ऐसे में एक ही कार्य के लिए नियमित वेतनमान के बजाय अल्प मानदेय देना संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। वर्तमान महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है, जबकि दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
एसोसिएशन ने यह भी आशंका जताई कि नियमित पद समाप्त होने से पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाएंगे, जिससे कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा। साथ ही कम वेतन और अस्थायी नियुक्तियों के कारण वनों की सुरक्षा, अवैध कटान की रोकथाम और वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि वन रक्षक विभाग की रीढ़ हैं और यदि यही आधार कमजोर होगा तो प्रदेश की वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराएगा।
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, सहायक वन रक्षक भर्ती प्रक्रिया को रोका जाए और पूर्व की तरह नियमित वेतनमान पर ही वन रक्षकों की भर्ती सुनिश्चित की जाए। साथ ही 500 पदों को यथावत रखते हुए विभागीय ढांचे में कोई बदलाव न किया जाए।
