एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
भाजपा प्रदेश पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि जिस कांग्रेस सरकार ने पहली कैबिनेट में एक लाख और बाद में पांच लाख नौकरियों का वादा किया था, वही अब हिमाचल में कर्मचारियों की नौकरियां छीन रही है। कश्यप ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाया जा रहा है या उनका वेतन रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के 182 पुराने आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही। विवि प्रशासन ने इस बार अस्थायी नियुक्ति केवल एक माह की अवधि के लिए करने का निर्णय लिया है। यह भर्ती प्रशासनिक और तकनीकी शाखाओं में की जा रही है। बताया गया कि 30 सितंबर को इन कर्मचारियों का करार समाप्त हो गया था। इनमें से कई कर्मचारी 8 से 12 साल से लगातार सेवा दे रहे थे, लेकिन नई भर्ती में उन्हें मौका नहीं दिया गया। इससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। कश्यप ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि विश्वविद्यालय को नए कर्मचारियों की भर्ती करनी पड़ी? क्या इस प्रक्रिया से कांग्रेस से जुड़े किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है?
महंगाई भत्ता देने में भी एक प्रतिशत का हेरफेर किया
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ने डीए (महंगाई भत्ता) की घोषणा में भी एक प्रतिशत का हेरफेर किया है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2023 से 4% डीए वृद्धि (कुल 46%) की घोषणा की थी, जबकि हिमाचल सरकार ने केवल 3% (कुल 45%) की। कश्यप ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों का एक प्रतिशत डीए छीन लिया है और उनकी मंशा कर्मचारियों के हित में नहीं है।
