एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) तथा दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय संगठनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर रामपुर में राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के तहत एक विशाल रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की कथित मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
रैली को संबोधित करते हुए हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा, सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, नीलदत्त शर्मा, कामराज, संजीव जोशी, तिलक वर्मा, राजपाल, तिलक ठाकुर, राजकुमार, सतीश, आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन की बबली और रोमिला, मिड डे मील वर्कर्स की राधा, कुशल्या और संगीता, किसान सभा के जिलाध्यक्ष प्रेम कायथ, रणजीत ठाकुर, दयाल भाटनु और सुभाष सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि 21 नवंबर 2025 को चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने की अधिसूचना जारी कर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया गया है। उनका कहना था कि इन श्रम संहिताओं से सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल के अधिकार पर अंकुश लगेगा तथा अधिकांश कारखाने श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्रम संहिताएं बिना व्यापक परामर्श और भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए लागू की गईं।
वक्ताओं ने मनरेगा को विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 से प्रतिस्थापित किए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना था कि इससे रोजगार की कानूनी गारंटी समाप्त हो जाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), मसौदा बीज विधेयक, बिजली (संशोधन) विधेयक 2025, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक तथा “शांति अधिनियम” के नाम से प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा कानून का भी विरोध किया। उनका आरोप था कि इन नीतियों से सार्वजनिक क्षेत्र कमजोर होगा और निजी व विदेशी कंपनियों को लाभ मिलेगा।
नेताओं ने बढ़ती बेरोजगारी, सरकारी विभागों में रिक्त पदों को न भरे जाने और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए बजट आवंटन पर्याप्त नहीं है, जबकि रक्षा और अवसंरचना क्षेत्रों पर अधिक खर्च किया जा रहा है। संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार से मांग की कि चारों श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए, मनरेगा को पूर्व स्वरूप में बहाल किया जाए, आंगनवाड़ी, आशा और मिड डे मील कर्मियों को नियमित सरकारी कर्मचारी बनाया जाए, 100% FDI के फैसले को वापस लिया जाए तथा सार्वजनिक क्षेत्र में खाली पदों को शीघ्र भरा जाए।
रैली के दौरान मजदूरों, किसानों और ग्रामीण श्रमिकों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
