नई दिल्ली (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले के 15 दिन बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए (Operation Sindoor Indian Air Force) ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। ये हमले मंगलवार देर रात करीब डेढ़ बजे बहावलपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में किए गए। ये सभी ठिकाने आतंकवादी संगठनों के थे और यहां से भारत पर हमलों की साजिश रची जा रही थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि हमलों में कितने आतंकी मारे गए हैं। सेना की ओर से आज इस संबंध में खुलासा किया जा सकता है। भारतीय सेना और वायुसेना की संयुक्त रूप से अंजाम दिए गए अभियान में अत्यंत सटीक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। रक्षा मंत्रालय और PIB ने बताया कि इस ऑपरेशन की योजना रणनीतिक रूप से बनाई गई थी ताकि आतंकियों को स्पष्ट और निर्णायक जवाब दिया जा सके। खास बात यह रही कि इस कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के किसी भी ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचाया गया, जिससे भारत ने यह संदेश भी दिया कि उसका उद्देश्य आतंक से लड़ना है, न कि पाकिस्तान से युद्ध करना।
पहलगाम हमला: 26 पर्यटकों की बेरहमी से की थी हत्या
यह कार्रवाई 22 अप्रैल के उस अमानवीय हमले के जवाब में की गई जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में आतंकियों ने हमला कर 26 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इनमें 25 भारतीय और 1 नेपाली नागरिक शामिल थे। हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था, और सरकार ने तुरंत सख्त कदम उठाने के संकेत दिए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 तारीख को पहलगाम हमले पर दो टूक कहा था कि आतंकियों को उनकी कल्पना से भी कड़ी सजा दी जाएगी और उन्हें हर हाल में खोजकर मारा जाएगा। उन्होंने दुनिया को यह भी संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उनकी यह टिप्पणी ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी का संकेत मानी जा रही थी।
✊ भारत का रुख: आतंक के खिलाफ निर्णायक कदम
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकी हमलों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। यह कार्रवाई न केवल पहलगाम हमले का जवाब है, बल्कि भविष्य में होने वाले आतंकी मंसूबों के खिलाफ एक सख्त चेतावनी भी है। PIB के अनुसार, ऑपरेशन से जुड़ी अधिक जानकारी आने वाले समय में साझा की जाएगी। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति में एक नया और निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
