एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
रामपुर उपमंडल के तहत आने वाले ग्राम कोटला के ग्रामीणों ने सरकार के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया है, जिसमें गुज्जर समुदाय को जमीन आवंटित करने की बात कही गई है। ग्रामीणों ने इस संबंध में एसडीएम रामपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1990 में नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना (NHPC) के लिए कोटला गांव के स्थानीय लोगों से लगभग 300 बीघा भूमि अर्जित की गई थी। यह भूमि परियोजना कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए ली गई थी, लेकिन इसका उपयोग केवल लगभग 100 बीघा भूमि तक ही सीमित रहा, जबकि शेष भूमि वर्ष 2015-16 तक खाली पड़ी रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जमीन विक्रय नहीं की गई थी, बल्कि परियोजना निर्माण के उद्देश्य से अर्जित की गई थी। इसलिए, उपयोग न होने की स्थिति में इसका पहला अधिकार विस्थापित परिवारों का होना चाहिए था। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने इस भूमि का हिस्सा महात्मा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज और राजस्व विभाग को सौंप दिया और अब इसे गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को बसाने के लिए आवंटित किया जा रहा है। पंचायत प्रधान तंपा देवी, कृष्ण लाल वर्मा, मोहन मेहता, ज्ञान दासी आदि ने कहा कि इस कदम से चारागाह भूमि, घासनियां और पशुधन चराई क्षेत्र प्रभावित होंगे, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका पर संकट आएगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के दौरान रोजगार और पुनर्वास के जो वादे किए गए थे, वे भी पूरे नहीं हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
