एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के आश्वासन के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। सोमवार यानी आज से प्रदेशभर में ओपीडी सेवाएं, रूटीन जांच और स्थगित ऑपरेशन दोबारा शुरू होने की उम्मीद है, जिससे हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, बीते तीन दिनों तक सीनियर डॉक्टरों ने सेवाएं संभालीं, लेकिन मरीजों की भारी भीड़ के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। अब रेजिडेंट डॉक्टरों की वापसी के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के धीरे-धीरे पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आईजीएमसी शिमला में आरडीए प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में आरडीए को शामिल किया जाएगा। इसके बाद आरडीए अध्यक्ष डॉ. सोहेल शर्मा ने हड़ताल समाप्त करने की औपचारिक घोषणा की।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत 22 दिसंबर को हुई, जब IGMC के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर राघव निरूला और एक मरीज के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। प्रारंभिक जांच के आधार पर राज्य सरकार ने 24 दिसंबर को डॉ. राघव निरूला को सेवा से बर्खास्त कर दिया। रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप था कि यह कार्रवाई एकतरफा है। डॉक्टरों का कहना है कि वायरल वीडियो में मरीज ने भी डॉक्टर पर हमला किया गया था।
रेजिडेंट डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
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डॉ. राघव निरूला का टर्मिनेशन ऑर्डर तत्काल रद्द किया जाए
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अस्पताल परिसर में डॉक्टरों को धमकाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो
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जान से मारने की धमकी देने वाले व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाए
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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं
