एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने रविवार को कहा कि प्रदेश की लगभग 3600 ग्राम पंचायतों में 1 फरवरी से प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त किए जाएंगे। ठाकुर ने इसे प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसमें पंचायती राज पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों के कब्ज़े में चली जाएगी।
उन्होंने कहा कि इससे लगभग 30,000 से अधिक चुने हुए जनप्रतिनिधियों की भूमिका प्रभावहीन हो जाएगी। ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह कदम महात्मा गांधी के पंचायती राज और ग्राम स्वराज के सपनों का गला घोंटने के बराबर है।
“सरकार ने पंचायत चुनाव में लगातार देरी की। अब सत्ता में मनमानी करते हुए अधिकारियों को पंचायतों में थोपना न सिर्फ लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि जनता की आवाज़ को दबाने जैसा कदम है। पंचायत प्रधान की मोहरे किसी काम की नहीं रह जाएंगी, उनके दस्तखत का कोई महत्व नहीं रहेगा,” उन्होंने कहा।
वोटर लिस्ट प्रकाशन में देरी और हाई कोर्ट के आदेश
जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के प्रकाशन की अंतिम तारीख 30 जनवरी थी, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी सूची प्रकाशित नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद अपनी हठधर्मिता छोड़ने को तैयार नहीं है।
“सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से भाग रही है। अगर पंचायत चुनाव समय पर नहीं हुए, तो लाखों लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होंगे। यह प्रदेशवासियों के साथ धोखा है,” ठाकुर ने कहा।
कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दिनदहाड़े गोलीबारी और धमाके आम बात बन चुके हैं। उदाहरण देते हुए ठाकुर ने कहा कि बद्दी में दिनदहाड़े गोलियां चली, और पुलिस प्रशासन माफिया और अराजक तत्वों को संरक्षण देने में व्यस्त है।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने शराब माफिया, खनन माफिया, वन माफिया, स्क्रैप माफिया, इंडस्ट्री माफिया और नशा माफिया जैसे कई अवैध तत्वों को संरक्षण प्रदान किया है।
“यदि सरकार माफिया को संरक्षण देना जारी रखती है, तो यह प्रदेश की संस्कृति, कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। पुलिस प्रशासन को जनहित के कामों में लगाना चाहिए, न कि माफिया के संरक्षण में व्यस्त रहना,” उन्होंने चेताया।
पंचायती राज के भविष्य पर प्रभाव
ठाकुर ने कहा कि प्रशासकों की नियुक्ति से पंचायतों में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से ग्राम स्तर पर जनता की भागीदारी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, और महात्मा गांधी के पंचायती राज के आदर्शों का अपमान होगा।
