एआरबी टाइम्स ब्यूरो | बिलासपुर
राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला के अवसर पर बिलासपुर में वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में कुल 20 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो शहर के 10 विभिन्न स्थानों पर अपनी आकर्षक कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। प्रतियोगिता के तहत प्रतिभागियों को समाज और क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषय जैसे बिलासपुर का विस्थापन, एंटी चिट्टा अभियान और पर्यटन जैसे विषय शामिल हैं।

इन विषयों के माध्यम से कलाकार अपनी रचनात्मकता के साथ सामाजिक जागरूकता और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित कर रहे हैं। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि नलवाड़ी मेला के दौरान इस वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य युवाओं में कला के प्रति रुचि बढ़ाना और समाज से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मेला में आने वाले लोग इन आकर्षक वॉल पेंटिंग्स के माध्यम से सामाजिक संदेश प्राप्त कर रहे हैं, जिससे यह प्रतियोगिता न केवल कला प्रदर्शन का माध्यम बन रही है बल्कि जनजागरूकता का प्रभावी साधन भी साबित हो रही है।
इसी पुल से मायके जाती थीं बिलासपुर रियासत की रानी

उधर, प्रदर्शनी में जलमग्न ऐतिहासिक पुल भंजवाणी औहर की कलाकृति मेले में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस अनोखी कलाकृति को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत स्थानीय मूर्तिकार प्रेम सिंह निवासी ग्राम कसेह बिलासपुर ने तैयार किया है। उन्होंने इस कलाकृति के माध्यम से उन ऐतिहासिक धरोहरों को जीवंत करने का प्रयास किया है, जो विस्थापन के कारण समय के साथ लुप्त हो चुकी हैं। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
प्रेम ने बताया कि इस ऐतिहासिक पुल की प्रतिकृति तैयार करने में उन्हें काफी समय और मेहनत लगी। इस दौरान उन्हें अपने अतीत की यादों को फिर से जीने का अवसर भी मिला। उन्होंने बताया कि उस समय इस पुल का जनजीवन में महत्वपूर्ण स्थान था। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, बिलासपुर रियासत की रानी अपने मायके जाने के लिए इसी पुल का उपयोग करती थीं, जबकि राजा औहर की ओर शिकार के लिए इसी मार्ग से जाया करते थे। उस समय बिलासपुर की बसें भी इसी पुल से होकर गुजरती थीं, जबकि आम लोग भी आवागमन के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते थे।
