एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
रामपुर नगर परिषद चुनाव में नाम वापसी के बाद अब सियासी तस्वीर पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है। तीन उम्मीदवारों के हटने के बाद नौ वार्डों में 24 प्रत्याशी मैदान में डटे हैं, लेकिन इस बार असली मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि दलों के भीतर भी देखने को मिल रहा है। नामांकन के अंतिम दिन तक 27 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन वार्ड नंबर 4 से राकेश गुप्ता, वार्ड नंबर 5 से संदीपा और वार्ड नंबर 3 से साधना शर्मा के नाम वापस लेने के बाद चुनावी गणित बदल गया है। अब कई वार्ड ऐसे हैं, जहां ‘अपनों’ के बीच ही टक्कर दिलचस्प मोड़ ले रही है।
वार्ड नंबर 2, 4 और 9 में इस चुनाव के सबसे हॉट सीट बनकर उभरे हैं। वार्ड नंबर 2 में कांग्रेस के दो चेहरे आमने-सामने हैं और एक प्रत्याशी भाजपा समर्पित है, जिससे वोट बैंक के बंटने की पूरी संभावना है। वहीं वार्ड नंबर 5 में चार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को पूरी तरह बहुकोणीय बना दिया है। जबकि भाजपा की एक उम्मीदवार मैदान में है। अन्य वार्डों में भी सीधी टक्कर है, लेकिन यहां मुकाबला अपेक्षाकृत साफ दिखता है। वार्ड नंबर 1, 5, 6 और 7 में दो-दो उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जबकि वार्ड नंबर 4 और 9 में प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने से परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि आंतरिक असंतुलन है। अगर वोटों का ध्रुवीकरण नहीं हुआ तो इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है। ऐसे में पार्टी के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ सबसे अहम मुद्दा बन गया है।
कुल मिलाकर रामपुर का यह चुनाव अब सिर्फ जीत-हार की लड़ाई नहीं, बल्कि रणनीति, समीकरण और संगठन की परीक्षा बनता जा रहा है। यही वजह है कि चुनावी माहौल दिन-ब-दिन और ज्यादा गरमाता जा रहा है।
चुनाव चिन्ह आवंटित, खर्च पर रहेगी कड़ी नजर
सहायक निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम रामपुर हर्ष अमरेंद्र सिंह ने सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी खर्च का पूरा रिकॉर्ड उम्मीदवारों को प्रतिदिन निर्धारित ऐप पर अपलोड करना होगा। आयोग की निगरानी इस बार और सख्त रहने वाली है।
