एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने शुक्रवार को कमला नेहरू अस्पताल को स्थानांतरित किए जाने तथा गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शिफ्ट करने के विरोध में जिलाधीश कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और राज्य सचिव फालमा चौहान ने संबोधित किया। प्रदर्शन से पूर्व समिति ने पिछले एक सप्ताह के दौरान शिमला शहर में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान का ज्ञापन जिलाधीश के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार को सौंपा। इसके बाद धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार महिला अस्पताल के साथ लगातार “छेड़छाड़” कर रही है। पहले महिलाओं की गायनी ओपीडी को आईजीएमसी स्थानांतरित किया गया और अब मदर एंड चाइल्ड यूनिट को भी वहां शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि 102 वर्ष पुराने इस अस्पताल में महिलाओं को सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलनी चाहिए।
समिति ने मांग की कि रोबोटिक सर्जरी, आईवीएफ सेंटर और स्मार्ट लैब जैसी सुविधाओं को कमला नेहरू अस्पताल में ही मजबूत किया जाए। वक्ताओं का कहना था कि आईजीएमसी पहले से ही भीड़भाड़ वाला अस्पताल है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक रहता है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए यह स्थान सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज को विशेष रोबोटिक सर्जरी की आवश्यकता हो तो उसे आईजीएमसी भेजा जा सकता है, लेकिन इसके नाम पर महिला अस्पताल को विभाजित करना उचित नहीं है। साथ ही सरकार द्वारा अस्पताल के कुछ हिस्सों का अन्य विभागों के लिए उपयोग करने की योजना को भी गलत बताया गया।
समिति ने मार्च और अप्रैल में बढ़ाए गए विभिन्न शुल्कों को वापस लेने की मांग की। जनवादी महिला समिति ने सरकार से कमला नेहरू अस्पताल को नियमित रूप से संचालित रखने और नए भवन निर्माण कार्य को तुरंत शुरू करने की मांग की है। साथ ही शिमला के नागरिकों, विशेषकर महिलाओं से इस मुद्दे पर समर्थन देने की अपील भी की गई।
