एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शुक्रवार से सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सैहब सोसायटी के करीब 800 सैहब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर के घरों और व्यावसायिक संस्थानों से कूड़ा नहीं उठेगा, जिससे सफाई व्यवस्था पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो गया है। यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
वेतन बढ़ोतरी रोकने से नाराज कर्मचारी
सैहब सोसायटी के कर्मचारी सालाना 10 फीसदी वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी वेतन बढ़ोतरी रोक दी गई है, जिससे वे नाराज हैं। नगर निगम प्रशासन के साथ हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद यूनियन ने हड़ताल का ऐलान किया। वीरवार को कर्मचारियों ने शहर में घर-घर जाकर पंफ्लेट बांटे और लोगों को अपनी मांगों की जानकारी दी। सैहब सोसायटी शिमला शहर के करीब 60 हजार घरों और व्यावसायिक संस्थानों से रोजाना कूड़ा उठाने का काम करती है। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल से पूरे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। खास बात यह है कि राजधानी में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण भी चल रहा है, जिसके बीच हड़ताल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
कलेक्शन सेंटरों से भी नहीं उठेगा कूड़ा
नगर निगम प्रशासन ने कलेक्शन सेंटरों से कूड़ा उठाने के लिए चालकों को निर्देश दिए थे, लेकिन चालकों ने भी शुक्रवार से हड़ताल में शामिल होने का फैसला लिया है। इससे शहर के कलेक्शन सेंटरों में भी कूड़ा जमा होने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि निगम प्रशासन का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन ने लगाया एस्मा
सैहब कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए जिला प्रशासन ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि हिमाचल प्रदेश आवश्यक सेवा अधिनियम 1973 की धारा 4 के तहत यह फैसला लिया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
