एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने मंगलवार शाम Gaiety Theatre में नगर निगम शिमला के पूर्व उप-महापौर Tikender Panwar द्वारा संपादित पुस्तक ‘सिटी लिमिट्स-द क्राइसिज़ ऑफ अर्बनाइजेशन’ का विमोचन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ हवा और जल जैसे अमूल्य संसाधन दिए हैं, जिनका संरक्षण हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी शिमला में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से बदलाव हुए हैं और अब सुनियोजित निर्माण समय की आवश्यकता बन गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला शहर को बिजली और संचार तारों के जाल से मुक्त करने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से भूमिगत डक्ट परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा सब्जी मंडी क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक परिसर विकसित किया जा रहा है, जबकि लिफ्ट क्षेत्र के पास अंडरपास भी प्रस्तावित है। शहर में 24 घंटे पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए 800 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना भी क्रियान्वित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सर्कुलर रोड चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जारी है और शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए हरित क्षेत्रों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संतुलन को केंद्र में रखकर विकास कार्य कर रही है। हिम-चंडीगढ़, हिम-पंचकूला और कांगड़ा में एयरो सिटी जैसी नई शहरी परियोजनाओं की योजना भी तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गृह मंत्री के साथ आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया था कि भविष्य में बादल फटने की घटनाएं केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेंगी। ऐसी घटनाएं उत्तराखंड और पूर्वाेत्तर राज्यों में भी बढ़ सकती हैं। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
इस अवसर पर झारखण्ड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि लोगों को अपने आचरण में सुधार करने की आवश्यकता है। पर्यटन से संबंधित चिंताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए जारी दिशा निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग पार्किंग सुविधा न होने के बावजूद कई वाहन खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के समय में ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण पर्यटकों के वाहन नहीं बल्कि मुख्य रूप से हिमाचल में पंजीकृत वाहन होते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को आत्म अवलोकन करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता है। शहरीकरण केवल डैमोग्राफिक बदलाव नहीं बल्कि समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया है। लाखों लोग साझा संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और शहरी निकायों तथा योजना व्यवस्था पर निर्भर हैं। लेकिन हमारी संस्थाएं इस बदलाव के साथ कदमताल नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि संस्थागत क्षेत्रों में रहने वाली कमी से कमजोर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
कार्यक्रम में शिमला के महापौर Surender Chauhan, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया Naresh Chauhan, शिक्षा सचिव Rakesh Kanwar, डीजी होमगार्ड्स Satwant Atwal, ट्रिब्यून ब्यूरो प्रमुख Pratibha Chauhan सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
