एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना से सबक लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी नियंत्रण और प्रबंधन वाले मंदिरों में दान व चढ़ावे की सुरक्षा के लिए एक नई SOP जारी की है। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव की ओर से जारी इन निर्देशों का उद्देश्य दानपात्रों में जमा होने वाली नकदी, सोने-चांदी के आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा को पुख्ता करना तथा पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। सरकार ने सभी संबंधित मंदिरों को 30 दिनों के भीतर इस पर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
दानपात्रों में दोहरी चाबी व्यवस्था और अनिवार्य रिकॉर्डिंग
नई एसओपी के तहत, अब मंदिरों में छेड़छाड़ रोधी (Tamper-proof) दानपात्रों का उपयोग किया जाएगा और प्रत्येक दानपात्र को एक विशिष्ट पहचान संख्या (ID) दी जाएगी। चोरी रोकने के लिए दानपात्रों की चाबियां दोहरे लॉक (Double Lock) या बहु-चाबी प्रणाली के तहत रखी जाएंगी, ताकि किसी भी एक व्यक्ति के पास इसका पूर्ण नियंत्रण न रहे। दानपात्र केवल पूर्व निर्धारित तिथियों पर ही खोले जाएंगे और चढ़ावे की गिनती के समय सीसीटीवी (CCTV) रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी।
नोट गिनने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन, मोबाइल पर पाबंदी
वित्तीय हेराफेरी को रोकने के लिए सरकार ने कड़े नियम लागू किए हैं:
कर्मचारियों पर सख्ती: चढ़ावे और नकदी प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) कराया जाएगा। गिनती कक्ष में मोबाइल फोन, बैग या कोई भी निजी सामान ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी होगी।
अकाउंट मैनेजमेंट: चढ़ावे से प्राप्त नकदी को गिनती के बाद अधिकतम एक कार्य दिवस (Working Day) के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा। सोने, चांदी और विदेशी मुद्रा के लिए अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे।
डिजिटल दान को बढ़ावा: श्रद्धालुओं को यूपीआई (UPI) या डिजिटल माध्यमों से दान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, हर साल मंदिरों का वार्षिक ऑडिट और मासिक आंतरिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
