एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश सरकार ने डॉक्टरों की पीजी और सुपर स्पेशलिटी (पीजी/एसएस) पॉलिसी में संशोधन कर अनुबंध आधार पर नियुक्त चिकित्सकों और जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को राहत दी है। अब नियमित जनरल ड्यूटी ऑफिसर के पद पर नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले इन डॉक्टरों को भी उच्च शिक्षा के लिए नीति का लाभ मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, संशोधित प्रावधानों के तहत पात्र अनुबंध डॉक्टरों और जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को पीजी (एमडी/एमएस) तथा पीजी (एमडीएस) पाठ्यक्रमों में 33.33 प्रतिशत कोटे का लाभ मिलेगा। इसके माध्यम से वे प्रदेश के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल कर सकेंगे। अनुबंध आधार पर नियुक्त डॉक्टरों की नियुक्ति कार्मिक विभाग की ओर से समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अनुसार होनी चाहिए।
हालांकि, पीजी कोर्स के दौरान जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को उतना ही स्टाइपेंड दिया जाएगा, जितना सीधे भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों को देय है। पीजी में चयनित जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को प्रदेश सरकार के साथ दो साल का बॉन्ड भरना होगा। इसकी राशि 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। बॉन्ड में पीजी पूरी करने के बाद एक साल की अनिवार्य फील्ड पोस्टिंग भी शामिल होगी।
अधिसूचना के अनुसार, पीजी पूरी करने के बाद डॉक्टरों को जॉब ट्रेनी के रूप में बची हुई सेवा अवधि भी पूरी करनी होगी। जॉब ट्रेनी की अवधि समाप्त होने के बाद ही पीजी कोर्स के लिए निर्धारित बॉन्ड की अवधि शुरू होगी। यानी संबंधित डॉक्टरों को पहले अपनी शेष जॉब ट्रेनी सेवा पूरी करनी होगी और उसके बाद बॉन्ड की अवधि पूरी करनी होगी।
संशोधित नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुबंध आधार पर नियुक्त जीडीओ और जॉब ट्रेनी डॉक्टरों की सेवाओं का नियमितीकरण सरकार की ओर से समय-समय पर अधिसूचित नीति के अनुसार किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के निर्णय के अनुरूप हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग या भर्ती के अन्य निर्धारित माध्यमों से भी नियुक्तियां की जा सकेंगी।
