एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर
नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में पाठ्यक्रम के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक और सह-पाठयक्रम गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास का माध्यम बनना चाहिए। मंत्री धर्माणी घुमारवीं क्षेत्र की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दधोल में तीन दिवसीय जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। इस प्रतियोगिता में जिले के 18 विद्यालयों के करीब 130 विद्यार्थी वाद्य संगीत, संस्कृत गीतिका, समूह गायन, नाटक, श्लोकोच्चारण, शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत और लोक नृत्य जैसी गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्म-अभिव्यक्ति की क्षमता को निखारते हैं और उनमें छिपी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर प्रदान करते हैं। धर्माणी ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल स्थान प्राप्त करने की होड़ से आगे बढ़कर भागीदारी की भावना को अपनाना चाहिए, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और सामाजिक जुड़ाव की भावना विकसित होती है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संगीत या शारीरिक शिक्षा शिक्षक न होने के बावजूद जो अध्यापक बच्चों को तैयार कर रहे हैं, वे सच्चे समर्पण और निष्ठा का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसे शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार योजना में सम्मानित करने पर विचार कर रही है, जो अपने विषय से परे जाकर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सांस्कृतिक विकास में योगदान दे रहे हैं।
