एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
EU Apple Import Duty : केंद्र सरकार ने अब यूरोपीय संघ (EU) से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क घटा दिया है। आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिए जाने से हिमाचल प्रदेश के बागवानों को तगड़ा झटका लगा है। केंद्र के इस फैसले को स्थानीय उत्पादक अपनी आमदनी और बाजार संतुलन पर असर डालने वाला कदम मान रहे हैं। सेब बागवानों का कहना है कि सरकार का यह फैसला बिल्कुल गलत है, इससे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। यह दूसरी बार है जब केंद्र ने बागवानों को मुश्किल में डाला है। इससे पहले केंद्र सरकार न्यूजीलैंड के साथ हुए समझौते के तहत वहां के सेब पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत कर चुकी है।
हालांकि, केंद्र सरकार दावा कर रही है कि रियायती शुल्क दर केवल सीमित मात्रा पर लागू होगी। शुरुआती तौर पर EU से 50 हजार मीट्रिक टन सेब ही 20% ड्यूटी पर आयात किए जा सकेंगे। इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलो तय किया गया है, जबकि प्रभावी लैंडेड कीमत लगभग 96 रुपये प्रति किलो रहेगी। लेकिन बागवानों का कहना है कि यह व्यवस्था 10 वर्षों तक लागू रह सकती है और भविष्य में आयात कोटा एक लाख टन सालाना तक बढ़ने की संभावना है।
हिमाचल के बागवान क्यों चिंतित हैं
हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में है। यहां उत्पादन लागत, परिवहन, पैकेजिंग और मौसमीय जोखिम पहले ही अधिक हैं। बागवानों का कहना है कि कम ड्यूटी पर आने वाला विदेशी सेब भारतीय बाजार में कीमतों पर दबाव डालेगा। इससे स्थानीय किसानों को अपनी फसल का लाभकारी मूल्य मिलना कठिन हो सकता है। साथ ही, आयातित सेब की चमकदार पैकिंग और आकार की एकरूपता उपभोक्ताओं को आकर्षित करती है, जिससे स्थानीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकता है। प्रदेश के कई जनप्रतिनिधियों और उत्पादक संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बागवान पहले आयात शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे थे, लेकिन इसके विपरीत इसे घटा दिया गया। यह कदम लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़े बागवानी क्षेत्र पर प्रभाव डाल सकता है।
