एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
रामपुर उपमंडल की सभी पंचायतों में एफआरसी (वन अधिकार समिति) के कार्यों की समीक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। 21 और 22 जनवरी को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में एफआरसी के कामकाज से संबंधित एजेंडा अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
उपमंडलाधिकारी हर्ष अमरेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में शिमला में राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के कार्यान्वयन को लेकर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शिमला जिले से जुड़े एफआरए मामलों की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई प्रकरण अभी भी एफआरसी स्तर पर लंबित हैं। उन्होंने बताया कि कई पंचायतों में एफआरसी द्वारा नियमित बैठकें न किए जाने के कारण दावों को आगे भेजने की प्रक्रिया धीमी हो रही है, जिससे पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
एसडीएम ने कहा कि ननखड़ी और रामपुर के खंड विकास अधिकारी, संबंधित तहसीलदार तथा नायब तहसीलदार तकलेच और सराहन यह सुनिश्चित करेंगे कि एफआरसी द्वारा मोहल सभाओं का विधिवत और नियमित आयोजन किया जाए। सभी बीडीओ को 31 जनवरी तक या उससे पहले एक समेकित अनुपालन रिपोर्ट इस कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 21 और 22 जनवरी को होने वाली ग्राम सभा बैठकों में पंचायत स्तर पर एफआरसी के कार्यों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यदि कहीं एफआरसी का कार्य असंतोषजनक पाया जाता है, तो उसके पुनर्गठन पर भी विचार किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, जिन पंचायतों में पहले से वन अधिकार से संबंधित दावे प्राप्त हो चुके हैं, वहां 31 जनवरी से पूर्व अनिवार्य रूप से मोहाल सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम ने कहा कि सभी निर्देशों के अनुपालन की निगरानी की जाएगी तथा ग्राम सभा की कार्यवाही में संबंधित चर्चा और निर्णय विधिवत रूप से दर्ज किए जाएंगे।
