एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ विज़न के तहत गद्दी समुदाय की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की पहल से गद्दी पशुपालकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में लगातार रणनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार पारंपरिक पशुपालन समुदायों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हुए उनके समावेशी विकास और आजीविका सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से ‘हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में चरवाहों के लिए रोजगार’ के तहत गद्दी समुदाय के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के माध्यम से पारंपरिक चरवाहा प्रथाओं का आधुनिकीकरण, स्थानीय नस्लों का संरक्षण और मजबूत बाजार संबंध स्थापित करके पशुपालकों के लिए स्थायी आय सुनिश्चित की जाएगी।
परियोजना के अंतर्गत उन्नत भेड़ और बकरी पालन प्रथाओं पर आधारित फार्म स्थापित किए जाएंगे, जिससे नस्ल सुधार और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार डिजिटल पशुधन पंजीकरण, क्रॉस-ब्रीडिंग, अनुवांशिक सुधार कार्यक्रम, कृत्रिम गर्भाधान और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं जैसे आधुनिक तकनीकों को लागू करने की योजना बना रही है। स्थानीय नस्लों जैसे गद्दी भेड़ और बकरियों, रामपुर बुशहरी भेड़ और चेगु बकरियों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उनकी अनुवांशिक विविधता और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी प्राकृतिक अनुकूलता बनी रहे।
बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ऊन, बकरी का दूध, मक्खन और मांस जैसे पशुपालन उत्पादों के विपणन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित करेगी। इसमें उत्पाद की गुणवत्ता प्रमाणन, प्रचार-प्रसार तंत्र और वित्तीय प्रोत्साहन के उपाय शामिल हैं, ताकि पशुपालकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके। संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए विशेष प्रावधान और बीमा कवरेज भी उपलब्ध होंगे।
इसके साथ ही डिजिटल पहल ‘भेड़-बकरी ओनर्स डिजिटल हर्ड आइडेंटिफिकेशन’ के माध्यम से ब्रीडर प्रोफाइलिंग, पशुधन स्वामित्व रिकॉर्ड और प्रवासी मार्गों का मानचित्रण सुनिश्चित किया जाएगा। परियोजना में डुअल ब्रीडिंग रणनीति अपनाई जाएगी, जिसमें राज्य में लगभग 6.4 लाख भेड़ और बकरियों की अनुवांशिक गुणवत्ता सुधारने के लिए गद्दी भेड़ के साथ मेरिनो और रैम्बौइलेट नस्लों का क्रॉस-ब्रीडिंग किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पशुपालकों, ब्रीडरों और युवाओं को प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और विस्तार सेवाओं के माध्यम से सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वन विभाग को गद्दी समुदाय के पारंपरिक चरागाह अधिकारों में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया और आगामी बजट में ऊन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि पर विचार करने की घोषणा की। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है।
