एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश में हाल के महीनों में गोलीकांड की बढ़ती घटनाओं के चलते राज्य सरकार ने हथियार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सख्त कर दिया है। अब जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) पिस्टल, रिवॉल्वर और बंदूक सहित किसी भी प्रकार का नया आर्म्स लाइसेंस सीधे अपने स्तर पर नहीं जारी कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी। पहले जिला मजिस्ट्रेट अपने विवेक से लाइसेंस जारी कर सकते थे, लेकिन हाल के हालात ने इस प्रथा में बदलाव की आवश्यकता को मजबूर किया है। सरकार का यह फैसला ऊना और बिलासपुर जिलों में हालिया गोलीकांड के मद्देनजर लिया गया है। गृह विभाग ने हथियारों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और लाइसेंस प्रणाली को अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है।
नई गाइडलाइन जारी और डीएम की जिम्मेदारी
गृह विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेट को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार की अनुमति के बिना कोई नया हथियार लाइसेंस जारी नहीं होगा। इसके साथ ही, लाइसेंस नवीनीकरण और क्षेत्र विस्तार (एरिया एक्सटेंशन) के मामलों में डीएम की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की गई है। गृह विभाग ने निर्देशों में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि हथियार लाइसेंस केवल उन्हीं आवेदकों को दिया जाए, जो आर्म्स एक्ट, आर्म्स रूल्स और सभी मानदंड पूरी तरह पूरा करते हों। जो लाइसेंस पहले से लंबित हैं और अभी तक स्वीकृत नहीं हुए, उन्हें फिर से समीक्षा के लिए जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देश और तय मानकों के अनुसार जांच के बाद ही लाइसेंस स्वीकृत होंगे।
प्रदेश में हथियारों की स्थिति
हिमाचल प्रदेश में करीब 1 लाख से अधिक लाइसेंसी हथियार हैं। परंपरागत रूप से बंदूकें फसलों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होती रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में रिवॉल्वर और पिस्टल रखने के मामले बढ़ गए हैं। सरकार का मानना है कि नए नियमों से हथियारों पर नियंत्रण मजबूत होगा और प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बेहतर बनी रहेगी।
