एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लकड़ी की तस्करी समेत अवैध कटान और अन्य वन अपराधों में महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता दी है। अदालत ने पुराने फैसले को पलटते हुए कहा कि भारतीय वन अधिनियम और राज्य के वन नियमों के तहत इन मामलों में पुलिस और वन अधिकारी बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकते हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये अपराध संज्ञेय होने के बावजूद जमानती रहेंगे, जिससे आरोपी को बांड भरने पर रिहा किया जा सकता है। इससे कानून सख्ती और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखता है।
हाईकोर्ट ने यह निर्णय स्टेट बनाम सतपाल सिंह (2009) मामले की पूर्व व्याख्या को पलटते हुए सुनाया। खंडपीठ के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रोमेश वर्मा ने कहा कि उस समय भारतीय वन अधिनियम की धारा 64 पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था, जिसके कारण अपराधों को असंज्ञेय माना गया। अब वन अधिनियम और राज्य नियमों के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय हो गए हैं। इसका मतलब है कि पुलिस या वन अधिकारी तुरंत गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे। इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश में लकड़ी तस्करी, अवैध कटान और वन उपज के अवैध परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। वन विभाग और पुलिस को कानूनी रूप से मजबूत अधिकार मिलने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
