एआरबी टाइम्स ब्यूरो
रामपुर बुशहर। हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक किसान मजदूर भवन, चाटी में आयोजित की गई। बैठक में किसानों और बागवानों से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई, साथ ही 4-5 नवंबर 2025 को शिमला में आयोजित होने वाले किसान जिला सम्मेलन की तैयारियों को लेकर भी रणनीति बनाई गई।
राज्य सचिव राकेश सिंहा, जिला महासचिव देवकी नंद और जिला अध्यक्ष प्रेम चौहान ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नवउदारवादी नीतियों के चलते आज खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। कृषि सब्सिडियों में कटौती से लागत दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, जिससे छोटे किसानों पर सीधा असर पड़ रहा है।
वक्ताओं ने प्रदेश में हाईकोर्ट के आदेशों के नाम पर किसानों की ज़मीनों से बेदखली और मकानों की तालाबंदी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह किसानों का पक्ष प्रभावी ढंग से उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में रखे ताकि गरीब और भूमिहीन किसानों को राहत मिल सके।
बैठक में यह भी उजागर किया गया कि सतलुज नदी पर बन रहे लुहरी (210 मेगावाट) और सुन्नी (382 मेगावाट) हाइड्रो प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों को अभी तक फसल नुकसान, मकानों की दरारों, और रोजगार का उचित मुआवजा नहीं मिला है।
संगठनों ने यह भी साझा किया कि दुग्ध उत्पादक संघ द्वारा जुलाई में किए गए दत्तनगर प्रदर्शन के बाद सरकार ने अप्रैल महीने के दूध दरों के एरियर को मंजूरी दी, जो अब दुग्ध उत्पादकों को मिलना शुरू हो गया है।
प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे: पूरण ठाकुर, कृष्णा राणा, हरदयाल कपूर, जय शिव ठाकुर, कपिल, विजय, राम लाल, करतार, रमन, संजय, काकू कश्यप, वीरेन्द्र, सुभाष, रणजीत, तुला राम, जय कृष्ण, देवी दास, राजीव, प्रदीप, दलीप, दुर्गा नंद आदि।
