एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर अनिश्चितता और गहराती जा रही है। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने इस संबंध में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। बताया जा रहा है कि यह कदम विस्तृत कानूनी सलाह लेने के बाद उठाया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश में पंचायत चुनाव लटकने की संभावना बढ़ गई है।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराए जाएं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण रोस्टर 28 फरवरी तक जारी किया जाए। हाईकोर्ट का मानना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करना संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें अनावश्यक देरी नहीं की जा सकती।
हालांकि, राज्य सरकार चुनाव कराने के लिए तैयार नजर नहीं आई। सरकार ने चुनाव टालने के पीछे ‘डिजास्टर एक्ट’ (आपदा प्रबंधन अधिनियम) का हवाला दिया। सरकार का तर्क है कि वर्तमान परिस्थितियां चुनाव कराने के अनुकूल नहीं हैं और इससे कानून-व्यवस्था व प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यह भी जानकारी सामने आ रही है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी दलीलों के समर्थन में डिजास्टर एक्ट का ही हवाला दे सकती है।
3577 पंचायतों में होने हैं चुनाव
प्रदेश में कुल 3577 पंचायतों और 73 नगरीय निकायों में चुनाव होने हैं। इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियां बेहद अहम होती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में ये तैयारियां अधूरी नजर आ रही हैं। चुनाव प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा मतदाता सूची होती है, लेकिन अब तक केवल दो जिलों ने ही वोटर लिस्ट जारी की है। शेष 10 जिलों में अभी तक मतदाता सूचियां जारी नहीं हो पाई हैं, जिससे चुनाव की समयसीमा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विपक्ष का आरोप जानबूझकर कर देरी कर रही सरकार
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनावों में देरी कर रही है ताकि स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी माहौल का सामना न करना पड़े। वहीं सरकार का कहना है कि वह किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहती और परिस्थितियों को देखते हुए जिम्मेदार फैसला लिया जा रहा है।
अब नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है, तो पंचायत चुनाव आगे खिसक सकते हैं। वहीं अगर हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया, तो सरकार पर तय समयसीमा में चुनाव कराने का दबाव और बढ़ जाएगा। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिमाचल प्रदेश की पंचायत राजनीति की दिशा तय करेगा।
