एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल में पेंशन गड़बड़झाला : हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर अनियमितता का मामला सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से कराए गए सत्यापन में यह खुलासा हुआ है कि सालों से पेंशन ले रहे 42,867 लाभार्थी या तो मृत हैं या फिर योजना की पात्रता शर्त को पूरा नहीं करते। इस गंभीर लापरवाही पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ई-केवाईसी सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी
दरअसल, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत लाभार्थियों की ई-केवाईसी प्रक्रिया मोबाइल एप के माध्यम से कराई गई थी। ई-केवाईसी के दौरान जब पेंशन डाटाबेस का अन्य सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। सत्यापन में पाया गया कि कुल 42,867 लाभार्थी ऐसे हैं, जो पेंशन सूची में शामिल होने के बावजूद पात्र नहीं थे। जांच में सामने आया कि इन 42,867 लाभार्थियों में से 37,335 लोग मृत हैं, जबकि 5,532 लाभार्थी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए अपात्र पाए गए। इसके बावजूद इन सभी के खातों में लंबे समय से सरकारी पेंशन राशि जारी होती रही। हालांकि, सीआरएस डाटा के प्रारंभिक सत्यापन के बाद अब तक 2,378 लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से हटाया जा चुका है। हालांकि, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभागों ने अभी और विवरण मांगे हैं, ताकि शेष मामलों की भी गहन जांच की जा सके। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और किसी भी पात्र व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
राज्य सरकार ने इस पूरे मामले पर गंभीर रूख दिखाया है। कहा गया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण मृत और अपात्र लोग सालों तक पेंशन लेते रहे, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। फील्ड स्तर से लेकर जिला और विभागीय स्तर तक सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं समाज के कमजोर, बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग वर्ग के लिए चलाई जाती हैं। ऐसे में इन योजनाओं का पैसा केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचना चाहिए। भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए ई-केवाईसी और सीआरएस आधारित सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक सख्त किया जाएगा। पेंशन डाटाबेस को नियमित रूप से मृत्यु पंजीकरण और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
