एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार जायका चरण-दो (JICA-2) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1300 करोड़ रुपये व्यय करेगी। इसके अतिरिक्त, आगामी तीन वर्षों में स्वास्थ्य संस्थानों को विश्व स्तरीय उपकरणों से सुसज्जित करने के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री शनिवार सायं पीटरहॉफ, शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) और चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) पहली बार मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद में शामिल हुए। लगभग साढ़े चार घंटे चले इस संवाद में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं, सुझावों और सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई तथा कई निर्णय मौके पर ही लिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रशासनिक ढांचे में वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। सीएमओ, बीएमओ और एमएस को अधिक वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए वित्तीय नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े निर्णय लेने की शक्तियां सीएमओ को प्रदान की जाएंगी तथा अस्पतालों की आवश्यकताओं के लिए विशेष निधि का प्रावधान किया जाएगा।
उन्होंने जॉब ट्रेनी डॉक्टरों के वेतन में बढ़ोतरी पर विचार करने, 236 चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर होने और 150 अतिरिक्त पद स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनेगा।
प्रदेश में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना की जा रही है, जहां 15 वर्ष पुराने उपकरण बदले जाएंगे और प्रत्येक संस्थान में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा सुनिश्चित होगी। चमियाणा और टांडा अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है, जबकि नेरचौक और हमीरपुर में शीघ्र आरंभ होगी। स्मार्ट लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
