एआरबी टाइम्स ब्यूरो | धर्मशाला
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस थाना भवारना के तहत बसकेहड़ क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर शातिरों ने 16 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को ट्राई (TRAI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर कई दिनों तक पीड़ित को मानसिक दबाव में रखा। मामले में पुलिस थाना भवारना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता को 25 अप्रैल को एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताते हुए कहा कि पीड़ित के आधार कार्ड से लिंक एक कैनरा बैंक एटीएम कार्ड नरेश गोयल नामक व्यक्ति के घर से बरामद हुआ है और वह एक गंभीर मामले में संदिग्ध हैं। इसके बाद ठगों ने दावा किया कि ईडी की टीम इस मामले की जांच कर रही है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 25 से 28 अप्रैल तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 4-5 कथित आईपीएस अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। इस दौरान आरोपियों ने ईडी के लोगो वाले कई फर्जी दस्तावेज भेजे, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकारी निर्देश होने का दावा किया गया।
27 अप्रैल को आरोपियों ने शिकायतकर्ता से उनकी संपत्ति और बैंक खातों की जानकारी मांगी। ठगों ने कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी राशि सरकार के पास “सुरक्षित” रखी जाएगी और जांच समाप्त होने के दो दिन के भीतर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। आरोपियों की बातों में आकर शिकायतकर्ता ने आरटीजीएस के माध्यम से 16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
ऐसे मामलों से कैसे बचें?
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।
- पुलिस, ईडी, सीबीआई या ट्राई कभी भी बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहते।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक डिटेल, ओटीपी या आधार संबंधी जानकारी साझा न करें।
- वीडियो कॉल पर धमकी या दबाव बनाए जाने पर तुरंत कॉल काटें और परिवार या पुलिस से संपर्क करें।
- किसी भी संदिग्ध साइबर कॉल की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर पोर्टल पर दें।
- फर्जी दस्तावेज और सरकारी लोगो दिखाकर लोगों को डराना साइबर अपराधियों का आम तरीका बन चुका है, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
