एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल परिवहन मजदूर संघ ने प्रदेश में परिवहन क्षेत्र के बिगड़ते हालात पर गंभीर चिंता जताई है। संघ के प्रदेश महामंत्री हरीश कुमार पराशर ने कहा कि वर्तमान स्थिति सिर्फ HRTC और निजी बस संचालकों के बीच का विवाद नहीं, बल्कि पूरे परिवहन तंत्र के अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने दोनों पक्षों से आपसी मतभेद भुलाकर जनता को सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन सुविधा प्रदान करने की अपील की।
पराशर ने आरोप लगाया कि बाहरी शक्तियों और बड़े उद्योगपतियों के षड्यंत्रों के चलते HRTC और निजी ऑपरेटर आपस में उलझ रहे हैं, जबकि असली लाभ अवैध परिवहन संचालक उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिमला, मनाली, धर्मशाला, कुल्लू जैसे पर्यटन स्थलों पर बिना रूट परमिट के वोल्वो, टेम्पो ट्रैवलर, टैक्सी और अन्य वाहन खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इन गैर-कानूनी गाड़ियों ने HRTC और निजी बस ऑपरेटरों — दोनों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है।
परिवहन मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अवैध संचालन पर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की तो संगठन आम जनता के साथ मिलकर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
मुख्य चिंताएँ:
-
बिना परमिट के अवैध वाहन यात्रियों को ढो रहे हैं, जिससे कानून की धज्जियाँ उड़ रही हैं।
-
सरकारी खजाने और निजी संचालकों दोनों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
-
बिना फिटनेस और बीमा के वाहन यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
संघ की अपील:
HRTC और निजी बस संचालक एक मंच पर आकर अवैध परिवहन के खिलाफ एकजुट हों।
सरकार तुरंत अवैध संचालन पर रोक लगाए और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करे।
जनता को यह समझाया जाए कि HRTC हिमाचल की जीवनरेखा है, विशेषकर ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में।
हरीश कुमार पराशर ने कहा —
“यह संघर्ष किसी संगठन का नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल को बचाने की लड़ाई है। यदि HRTC या निजी बस ऑपरेटर कमजोर हुए तो इसका सीधा असर हर नागरिक, हर गांव और हर मजदूर पर पड़ेगा।”
