एआरबी टाइम्स ब्यूरो
शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। भारत और चीन ने 2026 से लिपुलेख, शिपकी-ला और नाथू-ला दर्रों के माध्यम से सीमा व्यापार को पुनः शुरू करने पर सहमति जताई है। साथ ही, कैलाश पर्वत, मानसरोवर झील और गंग रेनपोछे की तीर्थयात्रा को फिर से शुरू करने और उसका विस्तार करने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।
हिमाचल प्रदेश सरकार लंबे समय से शिपकी-ला (किन्नौर) के ज़रिए चीन के साथ पारंपरिक व्यापार मार्ग को बहाल करने की दिशा में प्रयासरत थी। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात कर विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान सीमा व्यापार की बहाली को लेकर दोनों पक्षों ने रज़ामंदी जताई। यह सफलता मुख्यमंत्री सुक्खू के केंद्र सरकार को दिए आग्रहों और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को चीन के समक्ष औपचारिक रूप से उठाया, जिसके बाद व्यापार पुनः शुरू करने की सहमति बनी। राज्य सरकार अब इस दिशा में कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से संपर्क करेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिपकी-ला की ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दर्रा कभी प्राचीन सिल्क रूट का हिस्सा था और 1994 के भारत-चीन समझौते के तहत इसे औपचारिक व्यापार बिंदु के रूप में मान्यता मिली थी। यह क्षेत्र ट्रांस-हिमालयी व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों का केंद्र रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को शिपकी-ला के माध्यम से फिर से शुरू करने के विषय में भी राज्य सरकार को सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि शिपकी-ला मार्ग, गरटोक होते हुए मानसरोवर तक पहुंचने का सबसे छोटा और व्यावहारिक मार्ग है।
शिपकी-ला तक हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर और पूह होते हुए पहले से ही सुलभ सड़क मार्ग मौजूद है। इससे यात्रियों के लिए आधार शिविर और अन्य बुनियादी सुविधाएं आसानी से विकसित की जा सकती हैं।
केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सूचित किया है कि लिपुलेख (उत्तराखंड) और नाथू-ला (सिक्किम) दर्रों से कैलाश यात्रा पांच वर्षों के बाद पुनः शुरू हो चुकी है, और अब शिपकी-ला को एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में जोड़ा जा रहा है।
राज्य सरकार को आशा है कि इस ऐतिहासिक पहल से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक विनिमय को नया आयाम मिलेगा। मुख्यमंत्री ने चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में राज्य के मुद्दों को प्राथमिकता देने के लिए केंद्र सरकार का आभार भी व्यक्त किया है।