एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि जल विद्युत परियोजनाओं से नियमानुसार भू-राजस्व वसूलना राज्य का संवैधानिक अधिकार है और प्रदेश में कार्यरत सभी जल विद्युत परियोजना डेवलपर्स को यह राजस्व अनिवार्य रूप से अदा करना चाहिए। मुख्यमंत्री आज यहां प्रदेश में कार्यरत विभिन्न जल विद्युत परियोजना डेवलपर्स के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में भू-राजस्व के विशेष मूल्यांकन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और इन संसाधनों से होने वाले लाभ का हक प्रदेशवासियों को मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भू-राजस्व की दरों के युक्तिकरण को लेकर डेवलपर्स के साथ विचार-विमर्श किया जा सकता है। इसी संदर्भ में 25 मेगावाट क्षमता तक की जल विद्युत परियोजनाओं के डेवलपर्स के साथ 12 जनवरी को शिमला में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सुनिश्चित संसाधनों का सदुपयोग जनहित और विकास कार्यों के लिए कर रही है। जल विद्युत परियोजना डेवलपर्स की समस्याओं का समाधान करना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं तथा केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के समक्ष प्रदेश के अधिकारों के लिए मजबूती से पक्ष रखा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश को स्थायी सदस्यता देने और वर्ष 1966 से 2011 तक के लगभग 6500 करोड़ रुपये के एरियर शीघ्र जारी करने की मांग केंद्र से की है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अपने विचार साझा किए। विभिन्न हितधारकों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष अपने सुझाव और पक्ष रखे। बैठक में उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक सुन्दर सिंह ठाकुर और विनोद सुल्तानपुरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
