एआरबी टाइम्स ब्यूरो, कुल्लू
हिमाचल प्रदेश भवन, सड़क एवं अन्य निर्माण मजदूर यूनियन (सीटू) लुहरी प्रोजेक्ट 210 मेगावाट स्टेज-1 से संबद्ध मजदूरों ने आज एसजेवीएनएल एवं पटेल कंपनी प्रबंधन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मजदूरों के वेतन और मूलभूत श्रमिक अधिकारों की लगातार उपेक्षा के विरोध में किया गया।
यूनियन ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 का वेतन लगभग 20 दिनों की देरी से दिया गया, जबकि लिव सैलरी बोनस की अनुदान राशि पिछले दो वर्षों से लंबित है। इसके अलावा, पिछले एक वर्ष से मजदूरों के ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) का भुगतान भी रोका गया है।
यूनियन के अध्यक्ष श्री राजपाल भंडारी एवं महासचिव श्री दिनेश मेहता ने कहा कि कंपनी प्रबंधन द्वारा वेतन भुगतान में की जा रही देरी नए श्रम संहिता (लेबर कोड) के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिक हितों की अनदेखी जारी रही, तो यूनियन को आने वाले दिनों में हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
यूनियन का कहना है कि ईपीएफ और बोनस का भुगतान न करना मजदूरों के प्रति दोयम दर्जे के व्यवहार को दर्शाता है। साथ ही, सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में लागू किए गए श्रम संहिता के वादे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार द्वारा समय पर वेतन भुगतान का आश्वासन अब तक पूरा नहीं हुआ है।
इस धरना-प्रदर्शन में मजदूर नेता चंदर पाल, कपिल मोहर सिंह, परस राम, अजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में मजदूरों ने सक्रिय भागीदारी की। यूनियन ने कंपनी प्रबंधन से तत्काल दिसंबर माह का बकाया वेतन, लंबित बोनस तथा ईपीएफ राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।
