एआरबी टाइम्स ब्यूरो, कुल्लू
केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग एवं हिमाचल प्रदेश भू-अभिलेख विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भारत में भूमि प्रशासन में आधुनिक प्रौद्योगिकियों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन मनाली में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य लैंड रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन, ऑनलाइन सेवाओं और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि ड्रोन सर्वे, डिजिटल मैपिंग, जीआईएस आधारित रिकॉर्ड सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स के रूपांतरण के लिए पूर्ण सहायता प्रदान कर रही है तथा हिमाचल सहित कई राज्यों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन पेपरलेस रजिस्ट्रेशन और रेवेन्यू कोर्ट्स के ऑनलाइन सिस्टम जैसी पहलें जनता को बड़ी राहत दे रही हैं। इससे कार्यालयों के चक्कर कम हुए हैं और पेंडेंसी में भी गिरावट आई है।
प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) कमलेश कुमार पंत ने कहा कि भूमि संबंधी कार्य पारंपरिक रूप से जटिल माने जाते हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक आम नागरिकों के लिए इन प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बना रही है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य राज्यों के सफल मॉडल और बेहतर प्रथाओं को साझा करना है, ताकि नागरिकों को तेज और विश्वसनीय सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और भारत सरकार मिलकर राजस्व विभाग को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं ताकि भविष्य में भूमि प्रशासन और भी सुरक्षित, सरल और प्रभावी बन सके। सम्मेलन में संयुक्त निदेशक भूमि संसाधन विभाग, कुनाल सत्यार्थी, निदेशक भू-अभिलेख अभिषेक वर्मा, उपायुक्त कुल्लू तोरूल एस. रवीश सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
