एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
अपराधों पर लगाम लगाने और बाहरी व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए जिला दंडाधिकारी अनुपम कश्यप ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने जिले के सभी प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-फड़ी, फेरी वालों और अन्य अस्थायी कामगारों का पंजीकरण नजदीकी पुलिस थाने में करवाना अनिवार्य कर दिया है।
इस आदेश के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का हवाला देते हुए सभी उद्योगपतियों, ठेकेदारों, किसानों, और अन्य नियोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कामगारों का फोटो और पहचान पत्र सहित पूरा विवरण थाने में पंजीकृत करवाएं। इसके अलावा, सभी मकान मालिकों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी बाहरी व्यक्ति को किराये पर घर देने से पहले उसकी पहचान और चरित्र सत्यापन जरूर करवाएं। यह रिपोर्ट उस व्यक्ति के मूल निवास स्थान के थाने से बनवानी होगी।
कोई भी प्रवासी व्यक्ति जिले में बिना पंजीकरण रोजगार प्राप्त नहीं कर सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, उनके नियोक्ताओं और मकान मालिकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश 30 नवंबर, 2025 तक लागू रहेगा।
डीसी अनुपम कश्यप ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक विभिन्न कार्यों के लिए आते हैं और किराए के मकानों या निर्माण स्थलों पर अस्थायी रूप से रहते हैं। किसी भी अप्रिय घटना में बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता की जांच में पुलिस को परेशानी होती है। इसलिए यह पंजीकरण बेहद आवश्यक है।
