एआरबी टाइम्स ब्यूरो
मंडी। हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी मंडी, जिसे छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों सैर पर्व मंडी 2025 की तैयारियों में रंगी हुई है। यह लोक पर्व ऋतु परिवर्तन और नई फसल के आगमन का प्रतीक माना जाता है और इस वर्ष यह मंगलवार को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
किसानों की खुशहाली से जुड़ा लोक पर्व
सैर पर्व को अनाज पूजा का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन किसान अपने खेतों से लाई गई नई फसल जैसे मक्की, धान, तिल, कोठा और गलगल की पूजा करते हैं और ईश्वर से भरपूर उत्पादन की कामना करते हैं।
विशेष रूप से पेठू पूजन की परंपरा निभाई जाती है, जो भूमि और श्रम की पवित्रता को दर्शाता है।
बुजुर्गों से आशीर्वाद और अखरोट खेलने की परंपरा
इस दिन बुजुर्गों को अखरोट और दूर्बा (द्रुब) देकर आशीर्वाद लिया जाता है, जिसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बच्चे और युवा पारंपरिक रूप से अखरोट खेलते हैं, हालांकि इस दिन मक्की और अखरोट का सेवन वर्जित होता है।
भादो माह का समापन और देवी-देवताओं की वापसी
भादो मास, जिसे ‘काला महीना’ भी कहा जाता है, सैर पर्व के साथ समाप्त होता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान ग्राम देवता डायनों से युद्ध के लिए जाते हैं और सैर पर्व के दिन उनकी वापसी होती है।
गूरों द्वारा इस दिव्य युद्ध का लोक शैली में वर्णन किया जाता है, जो आस्था और परंपरा का जीवंत रूप है।
ग्रामीण संस्कृति और सामूहिक उत्सव
यह पर्व पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, लोक गीतों और नृत्यों से जीवंत हो उठता है। गांवों में सामूहिक भोज और मेलजोल का विशेष आयोजन होता है, जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को नई ऊर्जा देता है।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
तेजी से बदलती जीवनशैली में यह पर्व लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का माध्यम बनता जा रहा है। मंडी में यह केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता और लोकजीवन का प्रतीक बन गया है।
उपायुक्त की शुभकामनाएं
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने मंडी जिला वासियों को सैर पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सामाजिक सौहार्द लेकर आए।