एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान आई भीषण आपदा के कारण राज्य के आगामी पंचायत चुनावों अनिश्चितकाल के लिए टल सकते हैं। इस निर्णय की पुष्टि राज्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों के उपायुक्तों (डीसी) द्वारा सिफारिशों भेजी हैं। उपायुक्तों ने स्पष्ट किया कि मानसून की तबाही इतनी व्यापक है कि वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है।
आपदा के कारण व्यापक क्षति और प्रशासनिक व्यस्तता
वर्ष 2025 की बरसात ने हिमाचल प्रदेश में जानमाल का भारी नुकसान किया है। अब तक प्राप्त अनुमानों के अनुसार, राज्य में ₹7,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है, जबकि प्रदेशभर में 400 से अधिक लोगों की मौत हुई है। सरकारी भवनों, सड़कों, और पुलों सहित निजी संपत्तियों को भी व्यापक क्षति पहुंची है।
उपायुक्तों ने राज्य सरकार को भेजे गए अपने पत्रों में प्रमुखता से उल्लेख किया है कि उनके समस्त अधिकारी और कर्मचारी आपदा राहत कार्यों और प्रभावित लोगों को सहायता पहुँचाने में पूरी तरह व्यस्त हैं। ऐसे में, अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाना आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राहत प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
हमीरपुर जिले के उपायुक्त अमरजीत सिंह ने पंचायती राज विभाग को लिखे पत्र में गाँवों की सड़कों और रास्तों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की समस्या को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यातायात और संचार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव कराना वर्तमान समय में असंभव है।
स्थगित हुए 3577 पंचायतों और 40 शहरी निकायों के चुनाव
निर्वाचन आयोग ने दिसंबर में पंचायत चुनाव करवाने की प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी थी, जिसमें मतदाता सूचियों का प्रकाशन और आरक्षण रोस्टर तैयार करना शामिल था। इन चुनावों के तहत हिमाचल प्रदेश की 3,577 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान व वार्ड पंच के पदों पर मतदान होना था। इसके अतिरिक्त, 91 ब्लॉक समितियों के 1,600 सदस्य और 12 जिला परिषदों के 249 सदस्यों के लिए भी मतदान प्रस्तावित था।
इन ग्रामीण चुनावों के साथ ही, लगभग 40 शहरी निकायों के चुनाव भी जनवरी से पहले कराए जाने है, जिन्हें अब आगामी आदेश असमंजस स्थिति बन गई है। प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता अब प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने और क्षतिग्रस्त आधारभूत संरचना की मरम्मत पर केंद्रित है। चुनाव की नई तारीखें आपदा राहत कार्यों के आकलन के बाद ही तय की जाएंगी।