एआरबी टाइम्स ब्यूरो
रामपुर बुशहर। एफ.आर.एच. नोगली में एक दिवसीय सांप-हैंडलिंग और रेस्क्यू प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य फील्ड फॉरेस्ट स्टाफ और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को सांपों को सुरक्षित रूप से पकड़ने, बचाने एवं पुनर्वास की तकनीकों में दक्ष बनाना था, ताकि मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस प्रशिक्षण का संचालन दो अनुभवी विशेषज्ञों—श्री सुरेन्द्र शर्मा, क्षेत्रीय वन अधिकारी (RFO), पांवटा साहिब रेंज, और श्री वीरेंद्र शर्मा, वरिष्ठ वनरक्षक, सिंबलबारा राष्ट्रीय उद्यान—द्वारा किया गया। दोनों विशेषज्ञ अब तक सैकड़ों सफल सांप-रेस्क्यू अभियानों का हिस्सा रहे हैं और हिमाचल प्रदेश में पहला किंग कोबरा रेस्क्यू भी इन्हीं की टीम द्वारा किया गया था।
प्रशिक्षण में निम्न विषयों पर विशेष जानकारी दी गई:
विषैले और गैर-विषैले सांपों की पहचान
सांपों को सुरक्षित पकड़ने की तकनीक
सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार
सांपों की शारीरिक रचना और व्यवहार
नैतिक पुनर्वास (Ethical Rehabilitation)
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के कानूनी प्रावधान
विशेष उपकरणों द्वारा सांपों को नियंत्रित करने की विधियाँ
प्रशिक्षण के दौरान चूहा सांप (Rat Snake), ट्रिंकेट, कोबरा, करैत और अजगर (Python) जैसी प्रमुख प्रजातियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से प्रासंगिक रहा क्योंकि इस वर्ष के मानसून में RRT द्वारा लगभग 20–30 रेस्क्यू मिशन सफलतापूर्वक संचालित किए गए हैं।
सुरेन्द्र शर्मा द्वारा दिया गया विशेष प्रस्तुतीकरण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्री सुरेन्द्र शर्मा, RFO द्वारा प्रस्तुत किया गया विस्तृत प्रस्तुतीकरण था, जिसमें उन्होंने सांपों की पारिस्थितिकी और व्यवहार को समझाते हुए यह प्रेरणादायक संदेश दिया कि वनकर्मी केवल रेस्क्यू करने वाले नहीं, बल्कि सांप संरक्षणवादी (Snake Conservationists) बनें।
ट्रैंक्विलाइजेशन पर विशेष सत्र
सत्र के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में आवश्यक ट्रैंक्विलाइजेशन (tranquillisation) तकनीकों पर भी गहन मार्गदर्शन दिया गया, जो विशेष रूप से बड़े वन्यजीवों की सुरक्षित रेस्क्यू प्रक्रिया में उपयोगी होती हैं।
