एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू में ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड का एक गंभीर मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने UPI ट्रांजेक्शन के जरिए एक व्यक्ति के बैंक खातों से 3 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली। पीड़ित को कई दिनों तक इस धोखाधड़ी की जानकारी तक नहीं लगी, जिससे साइबर ठगों के नए तरीकों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार पीड़ित के एचडीएफसी बैंक रोहड़ू और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक देवली (टिक्कर) में खाते हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि 24 जनवरी से 7 फरवरी के बीच अज्ञात व्यक्ति ने UPI के माध्यम से कई ट्रांजेक्शन कर कुल ₹3,05,799 खाते से निकाल लिए। इन लेनदेन की न तो उन्हें जानकारी थी और न ही उन्होंने किसी को इसकी अनुमति दी थी। ठगों ने रकम को एक साथ निकालने की बजाय कई छोटे-छोटे ट्रांजेक्शनों में ट्रांसफर किया, जिससे शुरुआत में संदेह नहीं हुआ। बाद में बैंक स्टेटमेंट चेक करने पर अनजान UPI ट्रांजेक्शन दिखे और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
पीड़ित ने तुरंत संबंधित बैंकों से संपर्क किया और उसके बाद पुलिस थाना रोहड़ू में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल तकनीकी माध्यमों से यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। पुलिस बैंक खातों के लेनदेन रिकॉर्ड की जांच कर रही है और संदिग्ध खातों को चिन्हित किया जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं पीड़ित के मोबाइल, UPI ऐप या बैंकिंग डिटेल्स से किसी प्रकार की साइबर छेड़छाड़ तो नहीं हुई।
कैसे बचें ऑनलाइन बैंकिंग और UPI फ्रॉड से
साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। ये सावधानियां अपनाएं:
🔒 OTP, UPI PIN, ATM PIN किसी को न बताएं — बैंक कभी फोन पर नहीं पूछता।
📲 अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड न करें — फर्जी ऐप से डेटा चोरी हो सकता है।
📵 स्क्रीन शेयरिंग ऐप से बचें — ठग इसी से बैंकिंग जानकारी चुरा लेते हैं।
📊 नियमित बैंक स्टेटमेंट जांचें — छोटे ट्रांजेक्शन भी नजरअंदाज न करें।
☎️ संदिग्ध कॉल से सावधान रहें — KYC, इनाम, बिजली बिल जैसे बहाने आम हैं।
🚨 फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें
🌐 शिकायत करें: www.cybercrime.gov.in
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे डिजिटल लेनदेन करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें। समय पर जांच और जागरूकता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचने का सबसे बड़ा उपाय है। मामले की जांच जारी है।
