धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार दोपहर तपोवन धर्मशाला में माहौल राजनीतिक रूप से गर्म रहा। भोजनावकाश के दौरान कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों ने सदन के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाथों में नारे लिखी तख्तियां लिए विधायकों ने एनपीएस की राशि वापस करने, श्रम कानून वापस लेने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
सत्तापक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार नई पेंशन स्कीम (NPS) के तहत हिमाचल के कर्मचारियों की लगभग 9 हजार करोड़ रुपये की राशि वापस नहीं कर रही, जबकि राज्य सरकार लिखित आग्रह कई बार भेज चुकी है। कांग्रेस विधायकों का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है। कांग्रेस ने विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर के हालिया बयान को लेकर भी निशाना साधा। जयराम ठाकुर ने कहा था कि यदि सत्ता में आए तो कांग्रेस सरकार द्वारा पहली कैबिनेट से अब तक लिए गए सभी निर्णयों की समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि इस बयान ने OPS का लाभ लेने वाले कर्मचारियों में डर पैदा कर दिया है कि कहीं OPS फिर से समाप्त न कर दी जाए।
कांग्रेस का कहना है कि यदि केंद्र की ओर से रोकी गई राशि वापस मिल जाए तो राज्य बजट को राहत मिलेगी और विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रिया तेज की जा सकती है। सरकार का यह भी दावा है कि OPS निर्णय केवल पेंशन बहाली नहीं बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
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