एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुचर्चित युग हत्याकांड मामले में मंगलवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने दोषियों चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। वहीं, तीसरे दोषी तेजिंदर पाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। अब दोनों दोषी पूरी उम्र जेल में रहेंगे।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला सत्र न्यायाधीश शिमला से सजा की पुष्टि (कन्फर्मेशन) के लिए हाईकोर्ट को भेजा गया था। 6 सितंबर 2018 को सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में माना था। इसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
मासूम युग का अपहरण और निर्मम हत्या
जून 2014 को शिमला के रामबाजार से युग का अपहरण किया गया था। आरोपियों ने फिरौती के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। अगस्त 2016 में भराड़ी के पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ। आरोपियों ने उसके शरीर से पत्थर बांधकर जिंदा पानी के टैंक में फेंक दिया था। सीआईडी ने 25 अक्टूबर 2016 को इस मामले की चार्जशीट दाखिल की थी। 20 फरवरी 2017 से ट्रायल शुरू हुआ। 100 से ज्यादा गवाहों के बयान हुए। करीब 10 माह में ही अदालत ने दोषियों को सजा सुना दी थी। युग की हत्या से शिमला ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में गुस्से की लहर दौड़ गई थी। जगह-जगह लोगों ने प्रदर्शन किए और कैंडल मार्च निकाले। लोग दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे।
