एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चल रही रस्साकशी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी हाईकमान ने रेस में शामिल छह नेताओं को दिल्ली तलब किया है। इन सभी नेताओं की आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ अहम बैठक होनी है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी भी संभव है। यह मीटिंग हिमाचल कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव का रोडमैप तय कर सकती है। दिल्ली बुलाए गए नेताओं में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर, पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल, कसौली की विधायक विनोद सुल्तानपुरी और भोरंज से विधायक सुरेश कुमार शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सभी नेताओं के साथ पहले सामूहिक बैठक होगी, जिसके बाद खरगे इनसे वन-टू-वन बातचीत करेंगे। इसके बाद ही हिमाचल कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम लगभग तय हो जाएगा।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने अध्यक्ष पद के लिए कुलदीप राठौर और रोहित ठाकुर में से किसी एक को चुनने की सिफारिश की है। हालांकि, उनकी पहली पसंद कुलदीप राठौर बताए जा रहे हैं। राठौर इससे पहले भी हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं, रोहित ठाकुर को संगठनात्मक तौर पर सक्षम और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के करीबी माना जाता है। उधर, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने अपनी ओर से दो नाम हाईकमान के सामने रखे हैं इनमें विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार और पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल। अगर पार्टी भौगोलिक और जातीय संतुलन देखती है तो कांगड़ा जिला को साधने की रणनीति बना सकती है।
🔹 मुख्यमंत्री सुक्खू बोले – जल्द बनेगा नया अध्यक्ष
इस बीच, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस को अगले एक या दो हफ्तों में नया अध्यक्ष मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन मजबूत है और हाईकमान का निर्णय सभी को स्वीकार होगा। वर्तमान में प्रतिभा सिंह हिमाचल कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2025 में पूरा हो चुका है।
🔹 हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
कुल मिलाकर, हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। छह नेताओं की दिल्ली में होने वाली बैठक से तस्वीर साफ हो जाएगी कि संगठन की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी। हाईकमान के लिए यह फैसला केवल व्यक्ति चयन का नहीं, बल्कि प्रदेश में संगठन और सरकार के बीच तालमेल साधने की एक बड़ी परीक्षा भी मानी जा रही है।
