एआरबी टाइम्स ब्यूरो, निरमंड (कुल्लू)
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र में सोमवार देर रात हुए लैंडस्लाइड से एक बड़ा हादसा सामने आया। निरमंड ब्लॉक की घाटू पंचायत के शमारणी गांव में भूस्खलन की चपेट में आने से एक घर ढह गया और एक ही परिवार के 8 लोग मलबे में दब गए। हादसे में एक महिला की मौत हो गई है, जबकि 3 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। अभी भी चार लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। घायलों को उपचार के लिए निरमंड सिविल अस्पताल भेजा गया है। भूस्खलन की वजह से गांव के तीन अन्य घरों को भी नुकसान पहुंचा है।
पुलिस के मुताबिक, सोमवार रात करीब 1.30 बजे शमारणी घाटू में रात भारी बारिश के चलते लगभग 300/400 मीटर ऊपर भूस्खलन हुआ। इस भूस्खलन की चपेट में शिव राम और धर्मदास का एक मंजिला घर आ गया। हादसे में ब्रेस्ती देवी पत्नी शिव राम की मौत हो गई। जबकि शिव राम, धर्म दास और कला देवी को मौके से रेस्क्यू कर लिया गया। तीनों निरमंड अस्पताल में उपचाराधीन हैं। चुनी लाल पुत्र शिव राम, अंजू देवी पत्नी चुनी लाल, कुमारी जागृति पुत्री चुनी लाल और भूपेश पुत्र चुनी लाल अभी लापता हैं। उनकी तलाश जारी है।
12 सितंबर तक राज्य में बारिश का अलर्ट नहीं : विभाग
इधर, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, 12 सितंबर तक राज्य में बारिश का कोई अलर्ट नहीं है और मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। ऐसे में बंद पड़ी सड़कों, बिजली और पानी की बहाली के काम में तेजी आने की संभावना है। फिलहाल प्रदेश में 3 नेशनल हाईवे और 820 सड़कें बंद हैं। इससे लोगों की आवाजाही के साथ-साथ सेब और अन्य फसलों की ढुलाई प्रभावित हो रही है। खासकर, लाहौल-स्पीति का मशहूर आलू और चंबा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों से सेब की फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही।
अब तक 4100 करोड़ का नुकसान, 371 की जा चुकी है जान
हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून ने भारी तबाही मचाई है। राज्य में 1 जून से 8 सितंबर तक आई प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 4100 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति नष्ट हो चुकी है। इस दौरान 371 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 69 लोग लैंडस्लाइड, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं की चपेट में आए। वहीं, 41 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में 136 भूस्खलन (लैंडस्लाइड), 95 बाढ़ और 45 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन आपदाओं में 1204 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि 5140 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
