एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
जन्म और मृत्यु जीवन की दो सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं हैं, इसलिए इनका पंजीकरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह बात उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने आज जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के 100 प्रतिशत लक्ष्य को लेकर आयोजित अंतरविभागीय समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में सभी खण्ड विकास अधिकारी और जमीनी स्तर पर जुड़े कर्मचारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण सुशासन सूचकांक का पहला और महत्वपूर्ण पैरामीटर है, इसलिए इसका डाटा सटीक होना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंजीकरण में देरी न हो तथा किसी भी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आनी चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर प्रशिक्षण के बावजूद रिपोर्टिंग में कमियां आ रही हैं, जो चिंताजनक है। लोगों को जागरूक किया जाए ताकि भविष्य में किसी कार्य में प्रमाणपत्र के अभाव में असुविधा न हो।
विवाह पंजीकरण भी समय पर करें
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि विवाह के बाद निर्धारित समय में विवाह पंजीकरण करवाएं। देर होने पर लम्बी प्रक्रिया और अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था
बैठक में बताया गया कि सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के माध्यम से 01 जुलाई 2015 से पूरे प्रदेश में ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2025 में कुल 569 पंजीकरण इकाइयां कार्यरत हैं।
लेट फीस संरचना:
21 दिनों के भीतर पंजीकरण: निःशुल्क
21 से 30 दिन के भीतर: ₹20
30 दिन के बाद: ₹50 + जिला पंजीयक की स्वीकृति
1 वर्ष के बाद: ₹100 + आवश्यक दस्तावेज
परिवार रजिस्टर के आधार पर जारी जन्म प्रमाणपत्र अमान्य घोषित किए गए हैं। जन्म प्रमाणपत्र केवल आधिकारिक जन्म रजिस्टर के आधार पर ही जारी किए जाएंगे।
जुर्माना:
पंजीकरण में देरी पर संबंधित संस्थान के अधिकारी पर ₹1000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
जीरो रिपोर्टिंग यूनिट:
शिमला ग्रामीण, ठियोग, नेरवा, कोटखाई, रामपुर सहित 18 पंचायतें जीरो रिपोर्टिंग यूनिट में शामिल हैं। इन्हें विलम्बित पंजीकरण शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंगल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
