एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
सीटू क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर ने केंद्र में मोदी के नेतृत्व वाली कॉर्पोरेट, सांप्रदायिक, हिंदुत्ववादी और तानाशाही प्रवृत्तियों वाली सरकार द्वारा मजदूर-विरोधी व मालिक-समर्थक चार लेबर कोड को एकतरफा लागू करने के विरोध में रामपुर में लेबर कोड की प्रतियाँ जलाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह और मिलाप नेगी ने कहा कि बढ़ती बेरोज़गारी और महंगाई के बीच इन कोडों का नोटिफिकेशन मेहनतकश वर्ग पर ‘‘जंग का ऐलान’’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पूंजीपति साथियों के हित में देश को पुनः मालिक–नौकर वाले शोषणकाल में धकेलने की कोशिश कर रही है। नोटिफिकेशन जारी होने के महज़ 24 घंटों में देशभर में फैक्ट्रियों और कार्यस्थलों पर मज़दूरों द्वारा लेबर कोड की प्रतियाँ जलाकर विरोध जताने का सिलसिला शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि 21 नवंबर 2025 को जारी किया गया यह मनमाना और गैर-लोकतांत्रिक नोटिफिकेशन भारत के वेलफ़ेयर स्टेट के चरित्र पर सीधा हमला है।
दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र इंडस्ट्रियल फेडरेशनों का संयुक्त मंच 2019 में कोड ऑन वेजेज लागू होने के बाद से ही लगातार इन कोडों का विरोध करता रहा है। जनवरी 2020 में आम हड़ताल, 2020 में तीन अन्य कोडों के लागू होने के बाद 26 नवंबर की ऐतिहासिक हड़ताल तथा किसान “दिल्ली चलो” आंदोलन के साथ संयुक्त संघर्ष इसका उदाहरण हैं। इसके बाद 9 जुलाई 2025 को हुए आम हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक मज़दूर शामिल हुए थे।
नेताओं ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों की अनदेखी करते हुए केंद्र सरकार ने बिहार चुनाव की जीत से उत्साहित होकर मीडिया रिपोर्टों और लेबर मंत्रालय के ट्वीट्स के मुताबिक, लेबर कोड लागू करने में जल्दबाज़ी दिखाई है। ट्रेड यूनियनों ने 13 नवंबर को श्रम शक्ति नीति 2025 पर बैठक के दौरान इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) बुलाने और कोड वापस लेने की मांग की थी। 20 नवंबर की प्री-बजट कंसल्टेशन में भी यही मांग उठाई गई, पर सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सीटू नेताओं ने कहा कि सरकार ने मज़दूर संगठनों के बजाय एम्प्लॉयर्स और अपने समर्थक संगठनों की मांगों को प्राथमिकता देते हुए इन कोडों को लागू किया है। जॉइंट प्लेटफॉर्म ने इस कदम को ‘‘सबसे अलोकतांत्रिक, मजदूर-विरोधी और मालिक-समर्थक’’ बताते हुए कहा कि इसका जवाब इतिहास के सबसे व्यापक और तीखे विरोध से दिया जाएगा। सीटू ने इन कोडों को मज़दूरों की ज़िंदगी, रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर ‘‘नरसंहार जैसा हमला’’ करार दिया और कहा कि यदि ये लागू हुए तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने देश भर के मेहनतकशों से 26 नवंबर 2025 को SKM के नेतृत्व में संयुक्त विरोध और संघर्ष तेज करने की अपील की है। साथ ही सीटू ने अपने सदस्यों से काले बैज पहनकर विरोध दर्ज करने और सोमवार से गेट मीटिंग, नुक्कड़ सभा और बस्ती स्तर पर आंदोलन तेज करने का आह्वान किया। सीटू और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच सरकार को चेतावनी देता है कि लेबर कोड वापस लिए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा।
इस विरोध प्रदर्शन में सेब उत्पादक संघ के राज्य सचिव पूर्ण ठाकुर, सीटू जिला कमेटी सदस्य देवेंद्र, मंजू, मानिता, मीना, सुशीला, संतोष, राजू राणा, एतवारी, किरण, सुनीता सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
