एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
नगर परिषद रामपुर के अंतर्गत कार्य कर रहे ठेकेदारों में लंबे समय से लंबित भुगतानों को लेकर भारी आक्रोश है। ठेकेदारों का कहना है कि महीनों तक भुगतान अटके रहने से उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि काम जारी रखना संभव नहीं रह गया है। इसी के चलते ठेकेदार यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर भुगतान व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो नगर परिषद के अंतर्गत चल रहे सभी विकास कार्य सामूहिक रूप से बंद कर दिए जाएंगे।
ठेकेदार यूनियन का आरोप है कि नगर परिषद में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता समय पर बिल नहीं बनाते, जिससे भुगतान छह छह माह तक लंबित रहता है। कई बिल तो महीनों से फाइलों में ही घूम रहे हैं। इसका सीधा असर ठेकेदारों पर पड़ रहा है, जिन्हें निर्माण सामग्री का भुगतान, मजदूरों की मजदूरी और अन्य खर्च अपनी जेब से उठाने पड़ रहे हैं।
यूनियन का कहना है कि नगर परिषद एक ओर नए कार्य शुरू करने का लगातार दबाव बनाती है, लेकिन दूसरी ओर पहले से पूरे हो चुके कार्यों का भुगतान समय पर नहीं किया जाता। इस दोहरे रवैये ने ठेकेदारों को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है। कई ठेकेदार कर्ज़ लेकर काम करने को मजबूर हैं, जबकि मजदूरों को समय पर मजदूरी न मिलने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष विवेक शर्मा ने कहा कि बार-बार शिकायतों और बैठकों में मुद्दा उठाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। “तीन से छह महीने तक बिल लटके रहते हैं। ऐसे में ठेकेदार कैसे काम करें? अगर एक सप्ताह में भुगतान व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो सभी निर्माण कार्य बंद करना मजबूरी होगी,” उन्होंने कहा। इस संबंध में यूनियन ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और शहरी विकास विभाग के निदेशक को लिखित शिकायत भी भेजी है। ठेकेदारों का कहना है कि यह चेतावनी नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है।
वहीं नगर परिषद रामपुर के कार्यकारी अधिकारी बी.आर. नेगी का कहना है कि उन्हें ठेकेदार यूनियन की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि हाउस में यह प्रस्ताव पास हुआ था कि जो ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए, जिसके तहत पांच टेंडर रद्द किए गए हैं।
