एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बिलासपुर जिला के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि क्या हिमाचल प्रदेश के भाजपा सांसद और विधायक राज्य के अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगे?
मुख्यमंत्री ने बरठीं में री-रड़ोह पुल तथा दधोग टपें गांव में पुल निर्माण के लिए अढ़ाई करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इसके साथ ही बरठीं, गेहड़वी और झंडूता स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ने की भी घोषणा की। उन्होंने तलाई में सब तहसील, मल्होट में कोऑपरेटिव बैंक खोलने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलोल को अपग्रेड करने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भल्लू घाट में हुए सड़क हादसे से प्रभावित 16 परिवारों को 31-31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की तथा मरणोपरांत शौर्य चक्र विजेता बलदेव चंद के परिजनों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वह हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र से बनने वाले पहले कांग्रेस मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार से निकलकर प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के पांच हजार करोड़ रुपये विकास कार्यों की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए खर्च किए। वर्तमान सरकार से पिछली भाजपा सरकार को 50 हजार करोड़ अधिक मिला और 50 हजार करोड़ कर्ज के तौर पर लिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने आय के नए संसाधन विकसित किए और भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद किया। कांग्रेस सरकार ने तीन वर्षों में 23 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया, जबकि 26 हजार करोड़ रुपये ब्याज और मूलधन के रूप में चुका दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के तहत 73 वर्षों से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली ग्रांट को केंद्र सरकार ने बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है और मात्र 32 प्रतिशत भूमि पर लोगों का जीवन निर्भर है, इसके बावजूद केंद्र ने राज्य की विशेष परिस्थितियों को नजरअंदाज किया। उन्होंने एक फरवरी को हिमाचल के इतिहास का काला दिन बताते हुए कहा कि इसी दिन हर साल मिलने वाली लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की ग्रांट बंद की गई।
उन्होंने भाजपा सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि पांच वर्षों में न मिलने वाले 50 हजार करोड़ रुपये के मुद्दे पर सांसदों ने संसद में एक भी सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि यह जनता के अधिकारों पर डाका है और इस लड़ाई को जनता के सहयोग से लड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल के अधिकारों के लिए भाजपा विधायकों के नेतृत्व में भी दिल्ली जाने को तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने पर हिमाचल को मिलने वाली 1600 करोड़ रुपये की सहायता भी बंद कर दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दे रही है, जबकि केंद्र सरकार ने युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत अस्थायी भविष्य दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि चार साल बाद ये युवा क्या करेंगे, इस पर किसी ने विचार नहीं किया।
आपदा राहत को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की टीम ने 9300 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया, लेकिन भाजपा सांसद संसद में चुप रहे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं हर आपदा प्रभावित क्षेत्र में गए और झंडूता क्षेत्र का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि बिना किसी मांग के सरकार ने घर गिरने पर मिलने वाली सहायता राशि को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर सात लाख रुपये किया। इसके अलावा शहरों में 10 हजार और गांवों में 5 हजार रुपये किराया सहायता दी गई। उन्होंने कहा कि आम आदमी का दर्द बांटना ही व्यवस्था परिवर्तन है।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने झंडूता विधानसभा क्षेत्र में 42.43 करोड़ रुपये की चार विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए। उन्होंने 3.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित परमवीर चक्र विजेता नायब सूबेदार संजय कुमार राजकीय बहुतकनीकी, कलोल के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त 12.88 करोड़ रुपये की लागत से घुमारवीं-बरठीं-शाहतलाई सड़क उन्नयन, 25 करोड़ रुपये की लागत से शाहतलाई नगर की मल निकासी योजना तथा 1.25 करोड़ रुपये से चरण गंगा सौंदर्यकरण परियोजना का शिलान्यास भी किया।
