एआरबी टाइम्स ब्यूरो, किन्नौर
हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाने वाली सेब बागवानी को अल्टरनेरिया और मार्मोनिना जैसे घातक रोगों से बचाने के लिए डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और प्रदेश बागवानी विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों में 10 से 19 फरवरी तक विशेष राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट और मार्मोनिना लीफ ब्लॉच रोग सेब उत्पादकों के लिए गंभीर समस्या बनकर उभरे हैं। नमी वाले मौसम में तेजी से फैलने वाले ये रोग समय से पहले पत्तियों को गिरा देते हैं, जिससे न केवल फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है बल्कि पेड़ों की आयु भी कम हो रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए विश्वविद्यालय ने आठ विशेषज्ञ टीमों का गठन किया है। इन टीमों में नौणी विश्वविद्यालय, मशोबरा, बजौरा और किन्नौर के शराबो स्थित अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक शामिल हैं। इसके अलावा शिमला, सोलन, चंबा और किन्नौर के कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ तथा बागवानी विभाग के अधिकारी सीधे बागानों में जाकर किसानों से संवाद कर रहे हैं।
किन्नौर जिले की निचार पंचायत से इस महाअभियान की शुरुआत की गई। अभियान के प्रथम दिन विशेषज्ञ टीम—डॉ. अरुण नेगी, डॉ. डी.पी. भंडारी, डॉ. संदीप शर्मा और डॉ. सरस्वती नेगी—ने किसानों को रोगों के लक्षणों की पहचान, दवाइयों के सही एवं संतुलित छिड़काव की विधि तथा रसायनों के अनियंत्रित उपयोग को कम कर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बागवानों से अपील की कि वे समय पर रोग प्रबंधन अपनाएं और सलाह के अनुसार ही दवाइयों का प्रयोग करें, ताकि सेब उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
