एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
रामपुर बुशहर के ऐतिहासिक राजदरबार मैदान में आयोजित प्राचीन एवं जिला स्तरीय चार दिवसीय फाग मेले के दूसरे दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्था के साथ देवी-देवताओं की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान पूरा रामपुर शहर देव वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों से गुंज उठा। मेले में इस वर्ष 21 देवी-देवता शिरकत कर रहे हैं।
फाग मेला हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह मेला बुशहर रियासत के समय से आयोजित होता आ रहा है, जब राजपरिवार की देखरेख में देवताओं का स्वागत किया जाता था। आज भी उसी परंपरा को निभाते हुए राजदरबार मैदान इस मेले का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

शुक्रवार को देव रथों, पारंपरिक देव वाद्ययंत्रों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच देवी-देवताओं की शोभायात्रा मुख्य बाजार से होकर गुजरी। इस दौरान देवताओं के साथ आए देवलुओं ने पारंपरिक हिमाचली लोकनृत्य ‘नाटी’ प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया। बाजार में मौजूद लोगों ने भी श्रद्धा के साथ देवताओं का स्वागत किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
नृत्य करते हुए अपने देवताओं के साथ दरबार पहुंचे देवलु

नगर में फेरी लगाने के बाद सभी देवी-देवता राजदरबार मैदान की ओर प्रस्थान कर गए। यहां देव रथों की स्थापना के बाद दिनभर श्रद्धालु अपने इष्ट देवी-देवताओं के समक्ष नृत्य करते और पूजा-अर्चना करते नजर आए। मेले के दौरान दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस कारण यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक संरक्षण का भी महत्वपूर्ण मंच बन जाता है। चार दिनों तक चलने वाले मेले में पारंपरिक अनुष्ठान, लोकनृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देव संस्कृति की विविध झलकियां देखने को मिलेंगी, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
