एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
सीटू से संबद्ध सतलुज जल विद्युत निगम कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन (1500 मेगावाट परियोजना) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें यूनियन के 43 सदस्यों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक को संबोधित करते हुए यूनियन अध्यक्ष राजकुमार और महासचिव कामराज ने कहा कि 15 सितंबर 2025 को प्रबंधन और मजदूरों के बीच हुए समझौते को दस माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के तहत पात्र मजदूरों को ग्रेच्युटी का लाभ देने तथा कार्य के अनुरूप उचित वेतन और पद प्रदान करने का प्रावधान था, लेकिन प्रबंधन इन मांगों की लगातार अनदेखी कर रहा है।
यूनियन नेताओं ने बताया कि 23 मार्च 2026 को प्रबंधन को नया मांग-पत्र भी सौंपा गया था, लेकिन उस पर आज तक कोई सार्थक वार्ता शुरू नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन के कुछ अधिकारी यूनियन के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहे हैं तथा उसकी लोकतांत्रिक गतिविधियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
बैठक में नाथपा साइड में कार्यरत एक अधिकारी के व्यवहार को लेकर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया। यूनियन का कहना है कि संबंधित अधिकारी द्वारा मजदूरों को डराने-धमकाने, उन पर अनावश्यक दबाव बनाने तथा भेदभावपूर्ण व्यवहार करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। यूनियन ने स्पष्ट किया कि मजदूरों के साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।यूनियन ने प्रबंधन के कथित मजदूर-विरोधी रवैये की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यदि मजदूरों की जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मजदूरों की मांगों को लागू करवाने और प्रबंधन के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए 17 जून 2026 (बुधवार) से बस स्टैंड पर धरना-प्रदर्शन एवं रोष प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। यूनियन ने सभी मजदूरों से आंदोलन में एकजुट होकर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि श्रमिक अधिकारों की रक्षा और न्यायपूर्ण मांगों की पूर्ति के लिए सामूहिक संघर्ष जारी रहेगा।
